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झारखंड:चार कोयला कारोबारियों की हत्या करने आए पांच अपराधी गिरफ्तार….

झारखंड:चार कोयला कारोबारियों की हत्या करने आए पांच अपराधी गिरफ्तार…

रांची,। रांची पुलिस ने चार कोयला कारोबारियों की हत्या करने आए पांच कुख्यात अपराधियों को रविवार को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए अपराधी गैंगस्टर अमन साव गिरोह के सदस्य हैं। अपराधियों के पास से पुलिस ने 10 पिस्टल और 43 जिंदा कारतूस समेत घटना को अंजाम देने के लिए तैयार दोपहिया और चार पहिया वाहन भी जब्त किया है।

पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ अपराधी किसी की हत्या की मंशा से चुटिया में जमा हैं। इसके बाद तुरंत एक टीम का गठन किया गया। उक्त टीम ने चुटिया पावर हाउस स्थित एक किराए के मकान में छापेमारी कर पांचों अपराधी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अपराधियों में धनबाद के अभिजीत कुमार सिंह उर्फ सेंटी सिंह,सिकिदिरी के अजय सिंह, चुटिया के जगत कुमार उर्फ लक्की उर्फ गोलू,अनगड़ा के शिवनारायण महतो और रातू के समीर कुमार बाक्ची उर्फ कुल्लू बंगाली शामिल है।

रंगदारी देने से मना करने पर हत्या की योजना बनाई थी….

गैंगस्टर अमन साव ने रांची के चार कोयला कारोबारियों से एक करोड़ रुपए रंगदारी मांगी थी। कारोबारियों ने रकम देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद अमन साव ने चारों कारोबारियों की हत्या की योजना बनाई। इसके लिए पांच अपराधियों को कारोबारियों की हत्या के लिए रांची भेजा था। पत्रकारों से बातचीत के दौरान रांची के एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा ने बताया कि अमन साव गिरोह के सदस्यों की तलाश शुरू कर दी गई है। जल्द ही अन्य अपराधी भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे। प्रेसवार्ता में सिटी एसपी सौरभ, ग्रामीण एसपी नौशाद आलम समेत अन्य लोग मौजूद थे।

कोविड-19 और अम्फान तूफान ने पश्चिम बंगाल के ग्रामीण में RSS को पैर पसारने का दिया मौका….

कोविड-19 और अम्फान तूफान ने पश्चिम बंगाल के ग्रामीण में RSS को पैर पसारने का दिया मौका…

कोलकाता,। पिछले तीन महीने के दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने अपनी गतिविधियों में तेजी लाते हुए कोरोना वायरस महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों को खाना और मेडिकल मदद दे रहे हैं। इसके साथ ही उन लोगों की भी मदद कर रहे हैं जो अम्फान तूफान से राज्य में प्रभावित है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर इसकी विफलता को लेकर लगातार निशाना साधा जा रहा था और इसे राजनीतिक मुद्दा भी बनाया गया है।

भारतीय जनता पार्टी के विचारधारात्मक तौर पर मार्गदर्शक आरएसएस की पश्चिम बंगाल में 1800 शाखाएं हैं। मार्च में लगाए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के चलते आरएसएस के सदस्य दैनिक सभा नहीं कर सकते थे,लेकिन इनके सदस्यों ने संकट की इस घड़ी में मदद करने की कोशिशें की।

एजेंसी के साथ बात करते हुए आरएसएस की राज्य ईकाई के महासचिव जिष्णु बसु ने कहा- “कोविड-19 महामारी भारत में फैली हुई है। लोगों की मदद करना हमारा संपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए।”

आरएसएस के ट्रेड यूनियन से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने प्रवासी मजदूरों को सहयता मुहैया कराने के लिए बकायदा हेल्प डेस्क बना रखा है ताकि पूर्वोत्तर राज्य के साथ ही केरल, महाराष्ट्र और गुजरात के लोगों को रोजगार के अवसर दिए जा सके।बीएमएस ने दावा किया कि वह स्थानीय नियोक्ता से संपर्क कर रहे हैं।

बीएमएस के राज्य वर्किंग प्रसिडेंट रवि सिंह ने कहा, “हम पूरे बंगाल में 38 हेल्प डेस्क ऑपरेट कर रहे हैं। हमारे अनुमान के मुताबिक, 80 प्रतिशत प्रवासी फिर से राज्य को छोड़ देंगे। हम ऐसे लोगों के रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं और उन्हें काम वापस दिलाने के लिए मदद कर रहे हैं।”

गहलोत ने पायलट को हाशिए पर रखा,राजस्थान में मुद्दों को सुलझाने में नाकाम रही कांग्रेस…..

गहलोत ने पायलट को हाशिए पर रखा,राजस्थान में मुद्दों को सुलझाने में नाकाम रही कांग्रेस….

नई दिल्ली,। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच तनातनी के पीछे अभी तक केवल एक वजह सामने आई है। वो है, सरकार को अस्थिर करने की साजिश की जांच के लिए पुलिस द्वारा पायलट को 10 जुलाई को बुलाना। यहीं से राजस्थान की राजनीति में उथल-पुथल का दौर शुरू हो गया।

एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के अनुसार अपने उपमुख्यमंत्री के प्रति राजस्थान के सीएम का गहरा अविश्वास है और यही वजह है कि साल 2018 में बनी सरकार हाशिए पर खड़ी है। हालांकि,नोटिस तो अशोक गहलोत के पास भी गया है उन्हें भी अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया है, लेकिन पायलट के एक वफादर ने कहा कि उपमुख्यमंत्री को लगा कि वो जांच के निशाने पर हैं।

राजस्थान में गहलोत की अगुवाई वाली सरकार के पिछले दो सालों के कार्यकाल में ऐसे कई मौके पर पायलट को नीचा दिखाने का काम किया गया है। लेकिन कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने चेतावनी के संकेतों की अनदेखी की। अंत में, पार्टी ने इस साल जनवरी में राजस्थान के लिए एक समन्वय समिति बनाई लेकिन उस पैनल ने अब तक सिर्फ एक बैठक की है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा भाजपा पर अपनी सरकार गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि वह पार्टी को लेकर चिंतित हैं। सिब्बल ने इस ‘संकट’ से तुरंत निपटने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व कब ‘जागेगा’? उन्होंने ट्वीट किया, ‘पार्टी को लेकर चिंतित हूं। क्या हम तब जागेंगे जब हमारे हाथ से सब कुछ निकल जाएगा।’

कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने सिब्बल के ट्वीट पर कहा कि उनकी चिंता पार्टी के प्रत्येक सदस्य की चिंता है। तन्खा ने ट्वीट किया, ‘कपिल जी आपकी चिंता पार्टी के हर सदस्य की चिंता है। यह समय उन ताकतों को हराने के लिए एकजुट होने का है, जिनका केवल एक ही एजेंडा है ‘कांग्रेस और हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संस्थानों को कमजोर करना।’

वैसे भी राज्य में कांग्रेस की वापसी बिल्कुल सहज नहीं थी। पायलट, जिन्होंने दिल्ली में अपने परिवार को छोड़ा और फिर चुनाव में कांग्रेस के प्रचार अभियान की कमान संभाली लेकिन जब मुख्यमंत्री बनाने की बात आई तो जातिगत समीकरणों के आधार पर पायलट को कमान नहीं मिल पाई। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से अशोक गहलोत का खेमा राजस्थान में कांग्रेस के नेतृत्व को बदलने की मांग कर रहा है।

आगामी पंचायत चुनाव को देखते हुए दिल्ली में लॉबिंग भी शुरू कर दी गई है। यहां तक की एक समय में जब राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष थे तो उन्होंने इस समस्या का हल निकालने का प्रयास किया और दोनों नेताओं से कई दौर की मुलाकात की लेकिन कांग्रेस की पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी के बीच असहजता की स्थिति देखने को मिली।

इस साल की शुरुआत में,पायलट ने राज्य के कुछ क्षेत्रों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में चिंता व्यक्त की थी जिसे सीधे तौर पर गहलोत के खिलाफ टिप्पणी के रूप में देखा जाता है क्योंकि गृह मंत्रालय उन्हीं के पास है। कुछ महीने पहले,राज्यसभा चुनाव में भी दोनों के बीच तनाव बढ़ गया था।

गहलोत ने राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस पार्टी के सचिव नीरज डांगी को मैदान में उतारा। पायलट एक बड़ा जाना-पहचाना नाम चाहते थे,लेकिन गहलोत अपनी पसंद पर डटे रहे। और फिर,चुनावों से पहले,गहलोत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायकों को लालच दिया जा रहा है, यह दर्शाता है कि पार्टी एक सीट खो सकती है। हालांकि परिणाम इसके उलट आए और कांग्रेस ने दोनों सीट जीत ली। जीत का श्रेय पाने वाले पायलट ने कहा कि पहले फैले किसी भी तरह के संदेह निराधार थे।

कोटा में 107 बच्चों की मौत ने भी दोनों के बीच के अंतर को सामने ला दिया जिसमें पायलट ने कहा कि राज्य सरकार को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। पिछले महीने,संजय गांधी की पुण्यतिथि मनाने के लिए पार्टी मुख्यालय में एक समारोह में,पायलट ने कहा कि राज्य में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बड़ी मेहनत की है,ऐसे में उनको इसका रिवार्ड मिलना चाहिए।

भोपाल में चार नाबालिग समेत 5 लड़कियों के यौन शोषण में एक युवती व पत्रकार पर FIR

भोपाल में चार नाबालिग समेत 5 लड़कियों के यौन शोषण में एक युवती व पत्रकार पर FIR

भोपाल,। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में चार नाबालिग लड़कियों सहित पांच लड़कियों से कथित तौर पर यौन शोषण कराने के मामले में एक वरिष्ठ पत्रकार एवं इस अनैतिक काम में उसकी मदद करने वाली एक युवती के खिलाफ रविवार को यहां प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपी युवती को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है, जबकि पत्रकार फरार है।

भोपाल (दक्षिण) के पुलिस अधीक्षक साई कृष्ण थोटा ने ‘भाषा को बताया कि पांच लड़कियों का यौनशोषण करने के मामले में शहर के रातीबड़ पुलिस थाने में रविवार को जीरो पर प्यारे मिया (68) और एक महिला दलाल स्वीटी विश्वकर्मा (21) के खिलाफ बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वीटी को पकड़ लिया है और प्यारे मिया फरार हैं। उसकी तलाश जारी है।

उन्होंने कहा कि इस मामले को शहर के शाहपुरा थाने में भेजा जाएगा, क्योंकि उस इलाके में इनके साथ यौनशोषण हुआ था। थोटा ने बताया कि रातीबड़ थाने इलाके में रविवार तड़के करीब दो से तीन बजे के बीच पांच लड़कियां शराब के नशे में घूमती मिली थीं। इनमें से चार नाबालिग हैं, जबकि एक बालिग है।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने चाइल्ड हेल्पलाइन को बुलाकर लड़कियों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि प्यारे मिया नाम का एक आरोपी है, जिन्होंने इनको शहर के शाहपुरा थाने इलाके स्थित 12 नंबर में एक फ्लैट में शनिवार-रविवार रात को ‘बर्थ डे पार्टी के लिए बुलाया था। थोटा ने बताया कि इनमें से एक लड़की ने बताया कि वहां पर उसके साथ बलात्कार किया गया। वहीं, बाकी चार लड़कियों का कहना है कि पार्टी के नाम से बुलाकर प्यारे मिया ने उसी फ्लैट में उनके साथ भी पहले बलात्कार किया है।

इसी बीच, रातीबड़ पुलिस थाने के उपनिरीक्षक संजीव जाखड़ ने बताया कि प्यारे मिया पत्रकार है।उन्होंने कहा कि ये लड़कियां भटकते-भटकते रातीबड़ पुलिस थाने इलाके में आ गई थी। इसलिए हमारे थाने में ‘जीरो एफआईआर दर्ज किया गया और इसे शाहपुरा थाने को भेज दिया गया है। शाहपुरा थाना पुलिस ही इस मामले की विस्तृत जांच करेगी।

सचिन पायलट ने 30 विधायकों के समर्थन का दावा किया,कांग्रेस बोली- गहलोत सरकार सुरक्षित…..

सचिन पायलट ने 30 विधायकों के समर्थन का दावा किया,कांग्रेस बोली- गहलोत सरकार सुरक्षित….

नई दिल्ली,। राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस में अंदरुनी कलह के बीच उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने रविवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया और दावा किया कि उनके साथ 30 से अधिक विधायक हैं और गहलोत सरकार अल्पमत में आ चुकी है। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने कहा है कि गहलोत सरकार पूरी तरह से सुरक्षित है और अपना कार्यकाल पूरा करेगी।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से बतााया कि सोमवार को विधायक दल की बैठक में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कांग्रेस की सरकार बहुमत में है तथा विधायकों की मीडिया के सामने परेड भी कराई जाएगी। कांग्रेस सूत्रों का कहना है, ”पायलट को यह संदेश भिजवाया गया था कि वह एक संक्षिप्त बयान जारी करें कि उनकी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी में पूरी आस्था है तथा वो जो भी फैसला करेंगे वह उन्हें स्वीकार होगा।

उन्होंने कहा, ”देर रात पायलट की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन पायलट की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, देर शाम पायलट का 30 से अधिक विधायकों के समर्थन के दावे वाला बयान आने के बाद पार्टी नेतृत्व यह मान रहा है कि पायलट ने अपना मन बना लिया है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि कांग्रेस का मानना है कि पायलट के साथ आठ से ज्यादा विधायक नहीं जाएंगे और इनमें से भी कुछ को साथ लेने की कोशिश की जा रही है। उधर, एक अधिकारिक बयान में पायलट ने कहा कि वह सोमवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होंगे। बयान के अनुसार,”राजस्थान के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सचिन पायलट सोमवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होंगे।

पायलट ने कहा कि 30 से अधिक कांग्रेस और कुछ निर्दलीय विधायकों द्वारा उन्हें समर्थन देने के वादे के बाद अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में है। इस बीच, राजस्थान के लिए कांग्रेस के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे ने कहा कि राज्य में पार्टी के सभी विधायक उनके संपर्क में हैं और सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी।

पांडे ने इस बात पर हैरानी भी जताई कि वो कौन विधायक हैं, जो कथित तौर पर उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के पक्ष में खड़े हैं।राजस्थान में नया सियासी बवंडर शनिवार को उस वक्त उठ खड़ा हुआ जब मुख्यमंत्री गहलोत की ओर से सरकार को भाजपा द्वारा अस्थिर करने के प्रयास का आरोप लगाया गया। इस पूरे मामले पर पायलट ने रविवार शाम अपनी चुप्पी तोड़ी और अपने बागी रुख का संकेत दे दिया।

उधर, जयपुर में पार्टी के कई विधायक और निर्दलीय विधायक गहलोत के नेतृत्व में विश्वास प्रकट करने के लिये उनके निवास पर मुलाकात कर रहे हैं। पायलट के समर्थक माने जाने वाले कुछ विधायकों के शनिवार को दिल्ली में होने के वजह से गुटबाजी की चर्चा को हवा मिली थी। हालांकि तीन ऐसे विधायकों ने जयपुर आकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि दिल्ली वे अपने व्यक्तिगत कारणों से गये थे।
दानिश अबरार, चेतन डूडी और रोहित बोहरा ने कहा कि उनके बारे में मीडिया ने आंशका जताई थी, लेकिन वो पार्टी आलाकमान के निर्देशों का पालन पार्टी के एक सच्चे सिपाही की तरह करेंगे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई है, जिसके बारे में पायलट ने कहा कि वह इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान में इस संकट को टालने के मकसद से अपने वरिष्ठ नेताओं अजय माकन और रणदीप सुरजेवाला को केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर जयपुर भेजा है।

दिल्ली पहुंचे सचिन पायलट को झटका,खेमे के तीन विधायकों ने किया गहलोत का समर्थन…..

दिल्ली पहुंचे सचिन पायलट को झटका,खेमे के तीन विधायकों ने किया गहलोत का समर्थन….

तीनों विधायकों ने जयपुर पहुंचकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की…..

सचिन पायलट भी अपने कुछ विधायकों के साथ दिल्ली में….

जयपुर,। राजस्थान में गहराते राजनीतिक संकट के बीच राज्य के डिप्टी सीएम सचिन पायलट को झटका लगा है.सचिन पायलट के दोस्त और विधायक दानिश अबरार,चेतन डूडी और रोहित बोहरा ने बड़ा बयान दिया है.उन्होंने कहा है कि वह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थन में हैं.ये तीनों विधायक दिल्ली में ही थे.बता दें कि सचिन पायलट भी अपने कुछ विधायकों के साथ दिल्ली में हैं.

तीनों विधायकों ने जयपुर पहुंचकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की.मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर उन्होंने कहा कि हम लोग अपने व्यक्तिगत काम से दिल्ली गए थे.

दानिश अबरार ने कहा कि मेरा परिवार दिल्ली में ही रहता है.वहीं,चेतन डूडी ने कहा कि हम अपने व्यवसाय के सिलसिले में गए थे और रोहित वोहरा ने कहा कि हमारे बच्चे वहां रहते हैं, हम उनसे मिलने गए थे.

तीनों विधायकों ने कहा कि सचिन पायलट से पिछले दो दिनों में हमारी कोई बातचीत नहीं हुई.विधायकों के इस बयान के बाद ये अशोक गहलोत की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है,क्योंकि यह तीनों विधायक सचिन पायलट के दोस्त हैं.

तीन नेता जाएंगे जयपुर….

राजस्थान में गहराते राजनीतिक संकट के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी एक्शन में आ गईं हैं.सोनिया गांधी ने कांग्रेस के तीन नेताओं को जयपुर भेजने का फैसला लिया है.उन्होंने अजय माकन, रणदीप सुरजेवाला और अविनाश पांडे को जयपुर जाने को कहा है.तीनों नेता कांग्रेस विधायकों से बात करेंगे.अजय माकन,रणदीप सुरजेवाला और अविनाश पांडे रविवार रात जयपुर के लिए रवाना होंगे।

CM गहलोत ने बुलाई कांग्रेस विधायकों की बैठक,सचिन पायलट नहीं होंगे शामिल…..

CM गहलोत ने बुलाई कांग्रेस विधायकों की बैठक,सचिन पायलट नहीं होंगे शामिल….

जयपुर,। राजस्थान में कांग्रेस की बढ़ती मुश्किलों के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार (12 जुलाई) की रात पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई है, जिसमें उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट के शामिल होने की संभावना नहीं है। दरअसल, राजस्थान कांग्रेस संकट में घिरी है। उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से रिश्ते अच्छे नहीं हैं। पायलट और कांग्रेस के कुछ विधायक फिलहाल दिल्ली में हैं और पार्टी आलाकमान से मुलाकात की मांग कर रहे हैं। दोनों शीर्ष नेताओं के बीच तकरार की वजह राज्य की पुलिस द्वारा विधायकों की ”खरीद-फरोख्त” मामले की जांच का आदेश देना और पायलट को नोटिस भेजना है, जिसे लेकर पायलट नाराज हैं।

सूत्रों ने शनिवार (11 जुलाई) को कहा था कि राजस्थान पुलिस ने गहलोत और पायलट को भी नोटिस जारी कर कांग्रेस सरकार गिराने की कथित कोशिशों के संबंध में बयान दर्ज कराने के लिए कहा है। पुलिस के विशेष कार्यबल (एसओजी) ने सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी को भी बयान देने के लिए बुलाया है। एसओजी ने शुक्रवार (10 जुलाई) को हिरासत में लिए गए दो लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी, जो गहलोत सरकार गिराने के लिए कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त में कथित रूप से शामिल थे।

गहलोत ने शनिवार (11 जुलाई) को विपक्षी भाजपा पर आरोप लगाया था कि वह उनके विधायकों को बड़ी रकम देकर सरकार गिराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार न केवल स्थिर है बल्कि वह अपना पांच साल का कार्यकाल भी पूरा करेगी। वहीं भाजपा ने गहलोत से इन आरोपों को साबित करने के लिए कहा है।

30 कांग्रेसी MLA सचिन पायलट के संपर्क में….

राजस्थान के 30 कांग्रेसी विधायक और कुछ निर्दलीय विधायक प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के संपर्क में हैं और उन्होंने कहा है कि वे (पायलट) जो भी फैसला लेंगे उसका पूरा समर्थन करेंगे। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से रविवार (12 जुलाई) को यह जानकारी दी। हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि उनकी सरकार पर कोई संकट नहीं है।

राजस्थान संकट टालने के लिए कांग्रेस आलाकमान सक्रिय….

राजस्थान में गुटबाजी के संकट को टालने के लिए कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेताओं अजय माकन और रणदीप सुरजेवाला को केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर जयपुर भेजा है। सूत्रों ने कहा कि दोनों नेता पार्टी महासचिव और राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे के साथ रविवार (12 जुलाई) देर शाम तक जयपुर पहुंच जाएंगे और पार्टी विधायकों के साथ चर्चा करेंगे।

झारखंड:पाकिस्तान-बांग्लादेश का राष्ट्रगान सिखाने पर विवाद के बाद स्कूल ने मांगी माफी…..

झारखंड:पाकिस्तान-बांग्लादेश का राष्ट्रगान सिखाने पर विवाद के बाद स्कूल ने मांगी माफी….

घाटशिला,। झारखंड के घाटशिला में संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर (एसएनवीएम) की ओर से एलकेजी एवं यूकेजी के बच्चों को पाकिस्तान और बांग्लादेश का राष्ट्रगान पढ़ाए जाने से पैदा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। सोशल मीडिया पर लोग स्कूल स्कूल प्रबंधन की खूब आलोचना कर रहे हैं। कई राजनीतिक पार्टियों ने भी विरोध जताया है। हंगामा बढ़ने के बाद स्कूल प्रबंधन ने अपने निर्णय को वापस ले लिया है और माफी मांग ली है।

घाटशिला के बीडीओ संजय दास ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। स्कूल इंस्पेक्टर मामले की जांच करेंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई होगी। दैनिक हिंदुस्तान में 12 जुलाई के अंक में प्रमुखता से पाकिस्तान का राष्ट्रगान पढ़ाने पर हुआ विवाद शीर्षक से समाचार प्रकाशित हुआ था। रविवार को यह मामला सोशल मीडिया में छाया रहा। कई संगठनों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ घाटशिला थाना में शिकायत दर्ज कराई है।

पाकिस्तान का राष्ट्रगान पढ़ाना शर्मनाक….

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने झारखण्ड सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सीएए का विरोध करने वाले अब स्कूल प्रबंधन के समर्थन में दिखाई देंगे। उन्होंने ट्विट कर कहा कि झारखंड में अब यही देखना बाकी रह गया था। बच्चों को पाकिस्तान और बांग्लादेश का राष्ट्रगान पढाया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जेनरल नॉलेज के नाम पर राष्ट्रगान पढ़ाने वाले स्कूल प्रबंधन को चाहिए कि पाकिस्तान एवं बंगलादेश के आजादी का जश्न भी स्कूल में मनाना शुरू कर दें। भाजयुमो, एबीवीपी एवं रामनवमी केंद्रीय अखाड़ा समिति के सदस्यों ने घाटशिला थाना में ज्ञापन सौंपकर देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की है। भाजयुमो जिलाध्यक्ष रोहित सिंह ने कहा कि स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

स्कूल प्रबंधन ने मांगी माफी…..

संत नंदलाला स्मृति विद्या मंदिर के प्रिंसिपल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए बच्चों को टास्क दिया गया था। ताकि भारत के पड़ोसी देशों की संस्कृति, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय प्रतीक के बारे में जानकारी मिल सके। इसे दूसरे तरीके से नहीं लिया जाना चाहिए। अभिभावकों एवं नागरिकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए विद्यालय प्रबंधन की ओर से उक्त प्रोजेक्ट को स्थगित कर दिया गया है। विद्यालय परिवार इसके लिए क्षमा प्रार्थी है ।

सिंधिया की राह पर चले पायलट? एमपी के बाद क्या अब राजस्थान किला फतह करेगी बीजेपी…..

सिंधिया की राह पर चले पायलट? एमपी के बाद क्या अब राजस्थान किला फतह करेगी बीजेपी….

नई दिल्ली,। राजस्थान में कांग्रेस सरकार पर खतरे का बादल मंडरा रहा है। राजस्थान की पुलिस के एसओजी की तरफ से गहलोत सरकार को अस्थिर करने के मामले में समन के बाद सचिन पायलट नाराज होकर दिल्ली में हैं। ऐसे में पायलट के रविवार को बुलाई गई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में हिस्सा लेने की संभावना नहीं है। ये बैठक राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुलाई है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सचिन पायलट के संपर्क में कांग्रेस और निर्दलीय के करीब 30 विधायक हैं। ऐसे में सचिन पायलट जो भी फैसला लेंगे उसमें वो समर्थन कर रहे विधायक उनके साथ होंगे।

आपको बता दें कि कुछ महीने महीने में ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए थे और उसके बाद कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिर गई थी। अगर सचिन पायलट ऐसा कोई फैसला लेते हैं तो राजस्थान में बीजेपी की सरकार गिर सकती है। पायलट के दिल्ली आने पर ज्योतिरादित्य सिंधित्या ने अपना समर्थन किया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि साथी सचिन पायलट जिस तरह राजस्थान के मुख्यमंत्री की तरफ की दरकिनार कर उन्हें परेशान किया जा रहा है,उससे दुखी हूं। यह दर्शाता है कि कांग्रेस को प्रतिभा और क्षमता में थोड़ा ही विश्वास है।

क्या है राजस्थान विधानसभा का आंकड़ा…..

राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें है। कांग्रेस के पास 107 विधायकों का समर्थन हासिल है। इसके अलावा सरकार को 13 निर्दलीय और एक और राष्ट्रीय लोकदल के विधायक का समर्थन हासिल है। यानी, गहलोत सरकार के पास 121 विधायकों का समर्थन हासिल है।

बीजेपी के पास इस समय 72 विधायक हैं और मौजूदा स्थिति में समर्थन जुटाने के लिए उसे 29 विधायक चाहिए। ऐसे में अगर यह मान लिया जाए कि कांग्रेस और उसे समर्थन दे रहे निर्दलीय 30 विधायकों का आंकड़ा टूटता है तो कांग्रेस 91 पर आ जाएगी।

गहलोत ने दी सफाई…..

अशोक गहलोत ने अंदरुनी कलह को दरकिनार करते हुए सारा ठीकरा बीजेपी के ऊपर फोड़ते हुए कहा कि बीजेपी उनके विधायकों की बोली लगा रही है।

क्या है पूरा मामला…..

दरअसल, राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार को अस्थिर करने को लेकर बीजेपी के खिलाफ की गई शिकायत पर रास्थान पुलिस की तरफ के जांच के लिए एसओजी बनाई गई है। एसओजी ने इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट, चीफ व्हीप समेत कुछ पार्टी के नेताओं और मंत्रियों को समन कर बयान के लिए बुलाया है। सचिन पायलट एसओजी के इस समन से गहलोत के खिलाफ काफी नाराज हो गए हैं और वे शुक्रवार को रात को ही अपने कुछ समर्थक विधायक के साथ दिल्ली आ गए हैं।

विकास दुबे के लिए मुखबिरी के आरोप में गिरफ्तार पुलिसकर्मी को एनकाउंटर का डर,पहुंचा सुप्रीम कोर्ट……

विकास दुबे के लिए मुखबिरी के आरोप में गिरफ्तार पुलिसकर्मी को एनकाउंटर का डर,पहुंचा सुप्रीम कोर्ट…..

कानपुर,। कानपुर के हिस्ट्रीशीटर गैंगस्टर विकास दुबे के लिए मुखबिरी के आरोप गिरफ्तार दो पुलिसकर्मियों में से एक सब इंस्पेक्टर केके शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। केके शर्मा ने एनकाउंटर में मारे जाने की आशंका जताते हुए सुरक्षा की मांग की है। कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे के घर पर पुलिस ने दबिश दी थी। इसकी सूचना उसे पहले ही मिल गई थी। पुलिस टीम पर हुए हमले में आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।

केके शर्मा की पत्नी विनीता सिरोही द्वारा दाखिल याचिका में कानपुर कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे और उसके 6 साथियों की पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत का हवाला देते हुए सुरक्षा की मांग की गई है। साथ ही साथ इस घटना की सीबीआई से जांच कराने की बात भी कही गई है। याचिका में कहा गया है कि आरोपियों की न्यायिक हत्याओं से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग का रवैया कैसा है? यह स्पष्ट हो चुका है कि राज्य में कानून व्यवस्था की सुरक्षा के लिए काम करने वाले संस्थान ने कानून को अपने हाथ में ले लिया है और आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही हत्या कर दी जा रही है।

शर्मा और सिरोही ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि यूपी पुलिस की देखरेख में मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी। ऐसे में इस मामले की जांच के लिए किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या सीबीआई को जिम्मा सौंपा जाए। साथ ही साथ याचिकाकर्ताओं ने यह भी निवेदन किया है कि यूपी पुलिस को सुप्रीम कोर्ट एक निर्देश जारी करे कि केके शर्मा से पूछताछ कानपुर के माटी जेल में ही हो, जहां वो वर्तमान में है। उसे यहां से बाहर लेकर न जाया जाए।

याचिका में कहा गया है कि कानून का नियम देश में सवोच्च है और प्रत्येक आरोपी को संविधान के अनुच्छे 21 के तहत निष्पक्ष सुनवाई की गारंटी दी गई है। ऐसे में याचिकाकर्ता संविधान के अनुच्छे 14, 19 और 21 के तहत अपने मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

बता दें कि बीट इंचार्ज केके शर्मा और चौबेपुर थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर विनय तिवारी पर आरोप है कि दोनों ने विकास दुबे को पुलिस ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी थी। पुलिस विकास दुबे के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बिकरू गांव गई थी। इस घटना में डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी।

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