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भगवान राम को नेपाली बताने वाला पड़ोसी बुद्ध को भारतीय कहने पर भड़का,विदेश मंत्रालय ने समझाया…..

भगवान राम को नेपाली बताने वाला पड़ोसी बुद्ध को भारतीय कहने पर भड़का,विदेश मंत्रालय ने समझाया….

नई दिल्ली,। विदेश मंत्री एस जयशंकर के भगवान बुद्ध से जुड़े बयान पर रविवार (9 अगस्त) को विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था और वह स्थान नेपाल में है। दरअसल विदेश मंत्री ने शनिवार (8 अगस्त) को सीआईआई शिखर सम्मेलन में ऑनलाइन वार्ता के दौरान भगवान बुद्ध को भारतीय कहा था और नेपाल ने इस पर आपत्ति जताई थी।

जयशंकर के बयान पर नेपाल ने सख्त प्रतिक्रिया दी थी। नेपाल विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था, यह “ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों से यह तथ्य स्थापित और निर्विवाद तौर पर साबित हुआ है कि गौतम बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बिनी में हुआ था। बुद्ध का जन्मस्थान और बौद्ध धर्म का उत्पति केंद्र लुम्बिनी यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में से एक है।”

इससे पहले नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने भगवान राम को नेपाली बताकर विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा था, “असली अयोध्या नेपाल में है, न कि भारत में। भगवान राम नेपाली हैं न कि भारतीय।” हालांकि, खुद उनकी पार्टी के नेताओं और नेपाल के लोगों ने ओली के बयान की निंदा की थी। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता बामदेव गौतम ने बिना किसी सबूत इस तरह के दावे को लेकर पीएम की ओलोचना की थी।

इतना ही नहीं, केपी शर्मा ओली ने नेपाल में राम की मूर्ति बनवाने और इसे भगवान राम की जन्मस्थली के रूप में प्रचारित करने का आदेश भी दिया है। चितवन के स्थानीय अधिकारियों से फोन पर बात करते हुए ओली ने कहा कि सभी सबूत यह साबित करते हैं कि भगवान राम का जन्म नेपाल की अयोध्यापुरी में हुआ था, भारत में नहीं। उन्होंने सबूत जुटाने के लिए खुदाई कराने का भी आदेश दिया है।

रूस ने अमेरिका नहीं चीन को दी है परमाणु हमले की चेतावनी? जानिए ऐसा क्यों मान रहे हैं एक्सपर्ट…..

रूस ने अमेरिका नहीं चीन को दी है परमाणु हमले की चेतावनी? जानिए ऐसा क्यों मान रहे हैं एक्सपर्ट….

मॉस्को,। विस्तारवादी चीन अपने सभी पड़ोसियों से पंगे ले रहा है और रूस के साथ भी उसका टकराव बढ़ रहा है। इस बीच मॉस्को ने कहा है कि वह अपनी जमीन पर किसी मिसाइल हमले को परमाणु हमले की तरह लेगा और इसका जवाब परमाणु हथियारों से देगा। कुछ लोग मानते हैं कि मॉस्को ने यह चेतावनी अमेरिका को दी है लेकिन दूसरे एक्सपर्ट ताजा हालातों के मद्देनजर इसे चीन के खिलाफ साधा गया निशाना बता रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रतिक्रिया चीन द्वारा रूस के प्रभाव को क्षीण किए जाने का परिणाम है। बीजिंग की राजनीतिक और आर्थिक उन्नति ने रूस को कई लेवल पर चिढ़ाया है। हाल के भूराजनैतिक घटनाक्रमों ने इसी ओर इशारा किया है। इसके अलावा ने चीन ने आर्कटिक और मध्य एशिया में रूस के प्रभाव को नजरअंदाज किया है और रूस के ‘फार ईस्ट’ क्षेत्र में मजबूती से दावा किया है। रूस ने चीन पर इसके डिफेंस डिजाइन को कॉपी करने का भी आरोप लगाया है।

रूस और चीन किसी गठजोड़ से बेहद दूर हैं। दोनों देश अमेरिका के खिलाफ कभी-कभी साथ आ जाते हैं। मॉस्को ने हाल ही में बीजिंग को एस-400 सरफेस टु एयर मिसाइल सिस्टम की डिलिवरी को टाल दिया। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय पर उठाया गया जब चीन साउथ चाइना सी पर दावे सहित कई मुद्दों पर घिरा हुआ है।

रूस और चीन रिश्तों में 2014 के बाद सुधार हुआ था, जब पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से रूस नए व्यापार और निवेश सहयोगियों की तलाश में पूर्व की ओर देखने को मजबूर हुआ। लेकिन एक बार फिर बीजिंग और मॉस्को के बीच दरार दिखने लगे हैं। हाल ही में रूस ने अपने एक आर्कटिक रिसर्च पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने संवेदनशील जानकारियां चीन को दे दी।

चीन ने इस घटनाक्रम को यह कहकर हल्का करने की कोशिश की की मॉस्को पर यह कदम उठाने के लिए दबाव डाला गया है। रूस-चीन संबंधों के जानकार मानते हैं कि आर्कटिक शोधकर्ता पर जासूसी का आरोप क्षेत्र के दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास को दिखाता है।

क्या कहा है रूस ने?

रूस की सेना ने शुक्रवार को प्रकाशित एक लेख में चेतावनी दी कि उसका देश अपने क्षेत्र में आने वाले किसी भी बैलेस्टिक मिसाइल को परमाणु हमले के तौर पर देखेगा जिसका परमाणु हथियार से जवाब दिए जाने की जरूरत है। यह लेख जून में रूस की परमाणु प्रतिरोध नीति के प्रकाशन के बाद आया है जिसमें राष्ट्र के महत्वपूर्ण सरकारी और सैन्य ढांचों पर पारंपरिक हमले के जवाब में परमाणु हथियारों के उपयोग की बात कही गई है।

क्रसनाया ज्वेज्डा में प्रकाशित लेख में रूसी सेना के जनरल स्टाफ के वरिष्ठ अधिकारी,मेजर जनरल एंड्रेई स्टर्लिन और कर्नल एलेक्जेंडर क्रयापिन ने कहा कि यह तय करने का कोई तरीका नहीं है कि आने वाला बैलेस्टिक प्रक्षेपास्त्र परमाणु आयुध वाला है या परंपरागत आयुध वाला, इसलिये सेना इसे परमाणु हमले के तौर पर देखेगी।

चीन से टेंशन के बीच घातक गाइडेड बम और मिसाइलों से लैस होंगे ड्रोन,दुश्मनों पर रहेगी नजर,पल में होंगे तबाह…..

चीन से टेंशन के बीच घातक गाइडेड बम और मिसाइलों से लैस होंगे ड्रोन,दुश्मनों पर रहेगी नजर,पल में होंगे तबाह….

नई दिल्ली,। चीन से सीमा तनाव के बीच सेना इजरायली ड्रोन्स हेरोन को लेजर गाइडेड बम, गाइडेड मिसाइलों और एंटी टैंक मिसाइलों से लैस करना चाहती है ताकि दुश्मन के ठिकानों और आर्मर्ड रेजिमेंट्स को तबाह किया जा सके। चीता नाम के इस प्रॉजेक्ट की दोबारा समीक्षा की गई है। यह प्रॉजेक्ट काफी समय से लंबित है और इस पर 3500 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान है।

इस प्रॉजेक्ट के तहत तीनों सेनाओं के करीब 90 हेरोन ड्रोन्स को अपग्रेड किया जाएगा। ड्रोन्स में लेजर गाइडेड बम, हवा से जमीन पर और हवा से लॉन्च किए जाने वाले एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों को लोड किया जाएगा। सरकारी सूत्रों ने एएनआई को यह जानकारी दी है।

इस प्रॉजेक्ट पर जल्द ही रक्षा मंत्रालय की हाई लेवल कमिटी विचार करेगी, जिसमें रक्षा सचिव अजय कुमार भी शामिल होंगे, जो अभी तीनों सेनाओं के लिए सभी पूंजी खरीद के लिए इंचार्ज भी हैं। सेनाओं ने प्रस्ताव रखा है कि इन ड्रोन्स को मजबूत सर्विलांस और टोही पेलोड से लैस किया जाए ताकि दुश्मन के ठिकानों पर नजर रखी जा सके और जरूत पड़ने पर उन्हें तबाह किया जा सके।

भारत के मध्यम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोनों के बेड़े में हेरोन्स सहित अधिकतर इजरायली हैं। पूर्वी लद्दाख में चीन सीमा के अग्रिम इलाकों में इन्हें सेना और एयरफोर्स ने तैनात किया है। ड्रोन्स यह देखने में भी मदद कर रहे हैं कि चीनी सैनिक पीछे हट रहे हैं या नहीं या फिर उनकी तैनाती क्षमता क्या है।

दुश्मनों पर ड्रोन्स से घातक हमले के लिए ड्रोन्स को अपग्रेड करने के प्रॉजेक्ट में कई भारतीय ड्रोन्स भी शामिल होंगे। सूत्रों ने बताया कि इन अपग्रेड होने के बाद इन ड्रोन्स का इस्तेमाल परंपरागत सैन्य ऑपरेशन के साथ आतंकरोधी ऑपरेशनों के लिए भी होगा।

टोही क्षमता में विस्तार के बाद सेना जमीन पर सटीकता से यह पता लगा सकती है कि दुश्मन कहां छिपे हुए हैं। सेटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम के जरिए इन्हें दूर से ही कंट्रोल किया जा सकता है।

यूपी: हिंदू-मुस्लिम कारीगरों ने राम मंदिर के लिए तैयार किया 2.1 टन का घंटा…..

यूपी: हिंदू-मुस्लिम कारीगरों ने राम मंदिर के लिए तैयार किया 2.1 टन का घंटा….

एटा,। दाउ दयाल 30 वर्ष से अधिक वक्त से विभिन्न आकार-प्रकार की घंटियां बना रहे हैं लेकिन इस बार उन्होंने और उनकी टीम ने अयोध्या के राम मंदिर के लिए 2,100 किलोग्राम वजग का घंटा बनाकर उत्तर प्रदेश के जलेसर नगर (एटा) में हर किसी को चौंका दिया है। दिलचस्प बात यह है कि जिस व्यक्ति ने इसका डिजाइन तैयार किया है वह एक मुस्लिम कारीगर है और उसका नाम इकबाल मिस्त्री है।

दयाल ने कहा, ‘हमारे मुस्लिम भाइयों को डिजाइनिंग, घिसाई और पॉलिशिंग में विशेषज्ञता हासिल है।’ दयाल और मिस्त्री ने कहा कि यह पहली बार है जब उन्होंने इस आकार के घंटे पर काम किया है। चाढ़ पीढियों के घंटी निर्माता, 50 वर्षीय दयाल ने कहा, ‘जब आप इस आकार के घंटे पर काम करते हैं तो मुश्किलों का स्तर कई गुणा अधिक बढ़ता है। यह सुनिश्चित करना बहुत कठिन है कि महीने भर चलने वाली प्रक्रिया में एक भी गलती नहीं हो।’

उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए उत्साहित करने वाली बात यह है कि हम इसे राम मंदिर के लिए बना रहे हैं, लेकिन विफल होने का डर कहीं न कहीं हमारे दिमाग में था।’ मिस्त्री के मुताबिक ऐसे कार्यों में सफलता की किसी भी तरह की गारंटी नहीं होती है। अगर सांचे में पिघले धातु को डालने में पांच सेकेंड की भी देरी हो जाती है तो पूरी कोशिश बेकार हो जाती है।

अपनी उपलब्धि पर खुशी मनाते हुए 56 वर्षीय मिस्त्री ने कहा, ‘इसकी सबसे अनोखी बात है कि यह ऊपर से नीचे तक एकसार है। इसमें कई टुकड़े साथ नहीं जोड़े गए हैं। इसी कारण से यह काम बहुत मुश्किल था।’ यह घंटा न सिर्फ पीतल से बना है बल्कि ‘अष्टधातु’ यानि आठ धातुओं- सोना,चांदी, तांबा,जिंक, सीसा,टिन,लोहे और पारे के मिश्रण से बना है।

एटा जिले में जलेसर नगर परिषद के प्रमुख एवं घंटा बनाने वाले कार्यशाला के मालिक विकास मित्तल ने कहा, ‘यह वस्तु, जो भारत का सबसे बड़ा घंटा है,उसे राम मंदिर को दान दिया जाएगा।’ मित्तल परिवार को 2,100 किलोग्राम का घंटा तैयार करने का ऑर्डर राम मंदिर मामले में पिछले साल नवंबर में आए फैसले के तुरंत बाद निर्मोही अखाड़ा से मिला था, जो अयोध्या विवाद में एक वादी था।

देश की ‘सबसे बड़ी घंटियों में से एक’ को बनाने के लिए 25 कारीगरों की एक टीम जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों थे, ने एक महीने तक प्रतिदिन आठ घंटे काम किया। इससे पहले दयाल ने 101 किलोग्राम वजन का घंटा बनाया था, जिसका उपयोग उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर में किया गया।

राज्यपाल धनखड़ का ममता सरकार पर हमला,कहा- राज्य की अफसरशाही आग से खेल रही है…..

राज्यपाल धनखड़ का ममता सरकार पर हमला,कहा- राज्य की अफसरशाही आग से खेल रही है….

कोलकाता,। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य की शीर्ष नौकरशाही के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अफसरशाही लगातार आग से खेल रही है। उन्होंने रविवार (9 अगस्त) को ट्वीट किया, “शीर्ष नौकरशाही अनुच्छेद 166 (3) के तहत “व्यापार के नियम” की अवहेलना करते हुए लगातार आग से खेल रही है।”

अनुच्छेद 166 (3) के अनुसार राज्यपाल को कुछ व्यापार कार्यों में लेनदेन को सुविधाजनक बनाने के लिए नियम बनाने का अधिकार हैं। वर्तमान में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का विभिन्न मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के साथ तकरार चल रही है।

धनखड़ ने मुख्यमंत्री की एक प्रमुख परियोजना बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट के आयोजन पर होने वाले खर्च का ब्योरा भी मांगा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति और राज्य में कोविड-19 महामारी से निपटने के तरीकों को लेकर भी अपनी नाराजगी सार्वजनिक की है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- प्रधानमंत्री 15 अगस्त को आत्मनिर्भर भारत की रूपरेखा करेंगे प्रस्तुत…..

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- प्रधानमंत्री 15 अगस्त को आत्मनिर्भर भारत की रूपरेखा करेंगे प्रस्तुत….

नई दिल्ली,। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मनिर्भर भारत की रूपरेख प्रस्तुत करेंगे। रक्षा मंत्री ने कहा कि बड़ी हथियार प्रणालियों का निर्माण अब भारत में होगा। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए बड़े एवं कड़े निर्णय लिए जा रहे हैं। बता दें कि आज ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 101 हथियारों और सैन्य उपकरणों के आयात पर 2024 तक के लिए रोक लगाने के ऐलान किया।

इन उपकरणों में हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर, मालवाहक विमान,पारंपरिक पनडुब्बियां और क्रूज मिसाइल शामिल हैं। सिंह ने ट्विटर पर इसकी घोषणा करते हुए अनुमान लगाया कि इन निर्णय से अगले पांच से सात साल में घरेलू रक्षा उद्योग को करीब चार लाख करोड़ रुपये के ठेके मिलेंगे। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत आह्वान को आगे बढ़ाते हुए घरेलू रक्षा विनिर्माण को तेज करने के लिये अब बड़े कदम उठाने को तैयार है।

अधिकारियों के अनुसार,101 वस्तुओं की सूची में टोएड आर्टिलरी बंदूकें,कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें,अपतटीय गश्ती जहाज,इलेक्ट्रॉनिक युद्धक प्रणाली, अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत,फ्लोटिंग डॉक,पनडुब्बी रोधी रॉकेट लांचर और कम दूरी के समुद्री टोही विमान शामिल हैं।

सूची में बुनियादी प्रशिक्षण विमान, हल्के रॉकेट लांचर, मल्टी बैरल रॉकेट लांचर, मिसाइल डेस्ट्रॉयर, जहाजों के लिए सोनार प्रणाली, रॉकेट, दृश्यता की सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें अस्त्र-एमके 1, हल्की मशीन गन व आर्टिलरी गोला-बारूद (155 एमएम) और जहाजों पर लगने वाली मध्यम श्रेणी की बंदूकें भी शामिल हैं।

सिंह की घोषणा रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद नीति के मसौदे के एक सप्ताह के बाद सामने आई है। मसौदे में रक्षा मंत्रालय ने 2025 तक रक्षा विनिर्माण में 1.75 लाख करोड़ रुपए (25 अरब डॉलर) के कारोबार का अनुमान लगाया है।

सिंधु जल संधि बैठक:भारत का वीडियो कांफ्रेंस का सुझाव,पाक का अटारी सीमा पर मिलने पर जोर…..

सिंधु जल संधि बैठक:भारत का वीडियो कांफ्रेंस का सुझाव,पाक का अटारी सीमा पर मिलने पर जोर….

नई दिल्ली,। भारत ने पाकिस्तान को सिंधु जल संधि के तहत लंबित मुद्दों पर चर्चा कोरोना वायरस महामारी के चलते वीडियो कांफ्रेंस के जरिए करने का सुझाव दिया है, लेकिन इस्लामाबाद अटारी सीमा चौकी (चेक पोस्ट) पर बाचतीत करने पर जोर दे रहा है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।

पिछले हफ्ते एक पत्र में भारत के सिंधु आयुक्त ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से कहा था कि महामारी के कारण अटारी संयुक्त चौकी पर बैठक करना उपयुक्त नहीं होगा। सिंधु जल संधि के तहत लंबित मुद्दे पर चर्चा के लिए पाकिस्तान के अनुरोध पर मार्च के अंतिम सप्ताह में एक बैठक का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। लेकिन महामारी फैलने के कारण इसे टाल दिया गया।

सूत्रों ने बताया कि स्थिति के सामान्य होने में और अंतरराष्ट्रीय यात्रा बहाल होने में कुछ वक्त लग सकने पर गौर करते हुए भारतीय आयुक्त ने, जुलाई के प्रथम सप्ताह में, वीडियो कांफ्रेंस या किसी अन्य वैकल्पिक माध्यम से बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव दिया था।

वहीं, इसके जवाब में पाकिस्तान के आयुक्त ने जुलाई के अंतिम सप्ताह में लिखे अपने पत्र में पारंपरिक बैठक अटारी संयुक्त चौकी पर करने पर जोर दिया। एक सूत्र ने बताया, भारतीय आयुक्त ने इसका यह कहते हुए जवाब दिया कि उसके (भारत के) शिष्टमंडल की यात्रा के लिये और अटारी संयुक्त चौकी पर बैठक करने के लिए भारत में स्थिति अब भी अनुकूल नहीं है तथा पाकिस्तान की इच्छा के मुताबिक अटारी संयुक्त चौकी पर इस तरह की बैठक की अनुमति देने में कुछ वक्त लग सकता है।

सूत्रों ने बताया कि भारतीय आयुक्त ने पाकिस्तानी पक्ष से लंबित मुद्दों और नये मुद्दों पर एक व्यवहार्य विकल्प के तौर पर डिजिटल बैठक करने पर भी विचार करने को कहा। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि यहां तक कि अन्य देशों के साथ राजनयिक वार्ता डिजिटल बैठकों के माध्यम से हो रही हैं और सिंधु बैठक इसी तरह से हो सकती है।

अभी दोनों पक्षों के बीच एक लंबित मुद्दा किशनगंगा और रातले पनबिजली परियोजनाओं को लेकर असहमति है। किशनगंगा परियेाजना 2018 से ऑपरेशन में है जबकि रातले पर काम 2014 से रूका हुआ है क्योंकि जम्मू कश्मीर सरकार और ठेकेदार के बीच एक अनुबंध विवाद है।

लंबी बातचीत के बाद भारत ने 2016 में इस मुद्दे के हल के लिए एक निष्पक्ष विशेषज्ञ नियुक्त करने की मांग की थी जबकि पाक ने मध्यस्थता अदालत नियुक्त किए जाने का अनुरोध किया था। आगे की राह तलाशने के लिये नवंबर 2019 में जल शक्ति मंत्रालय के सचिव के नेतृत्व में विश्व बैंक के साथ एक बैठक के बाद यह सहमति बनी थी कि संधि के प्रावधानों के मुताबिक दोनों आयुक्त इस विषय पर चर्चा करेंगे ताकि समाधान के माध्यम-मध्यस्थता अदालत या निष्पक्ष विशेषज्ञ-पर निर्णय हो सके।

विश्व बैंक ने शुरूआत में दोनों माध्यमों पर आगे बढ़ने की कोशिश की लेकिन बाद में दिसंबर 2016 में इसने दोनों प्रक्रियाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया ताकि दोनों पक्ष द्विपक्षीय तरीके से एक विकल्प चुन सकें। संधि के तहत विश्व बैंक की भूमिका सिर्फ कार्यप्रणालीगत है और इस बारे में इस वैश्विक वित्तीय संस्था के कोई स्वतंत्र फैसला लेने का कोई प्रावधान नहीं है।

सूत्रों ने बताया कि विश्व बैंक की अस्थायी भूमिका अब भी जारी है। अगस्त एवं सितंबर 2017 में वाशिंगटन में विश्व बैंक कार्यालय में सचिव स्तर की दो त्रिपक्षीय बैठक हुई। नवंबर की वार्ता के बाद भारतीय आयुक्त ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को फरवरी 2020 में स्थायी सिंधु आयोग की बैठक करने के लिये आमंत्रित किया। यह बैठक मार्च में होने का कार्यक्रम था लेकिन महामारी के चलते इसे टाल दिया गया।

सिंधु जल संधि के तहत गठित स्थायी सिंधु आयोग पर 1960 में दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए थे। यह संधि दोनों आयुक्तों के हर साल कम से कम एक बार मिलने का प्रावधान करती है। यह बैठक दोनों देशों में क्रमवार रूप से होंगी। संधि के मुताबिक रावी, व्यास और सतलुज का जल विशेष रूप से भारत के लिये होगा जबकि सिंधु, चेनाब और झेलम नदियों के जल के उपयोग का अधिकार पाकिस्तान के पास होगा। उसे कृषि, नौवहन, घरेलू उपयोग और पनबिजली परियोजनाएं विकसित करने पर निर्बाध अधिकार दिये गए हैं।

UP:योगी के मंत्री बृजेश पाठक ICU में,सांस लेने में दिक्कत पर लखनऊ PGI में भर्ती,घर पर थे आइसोलेट….

UP:योगी के मंत्री बृजेश पाठक ICU में,सांस लेने में दिक्कत पर लखनऊ PGI में भर्ती,घर पर थे आइसोलेट…

लखनऊ,। योगी सरकार के कानून मंत्री बूजेश पाठक को सांस लेने में तकलीफ के चलते रविवार सुबह लखनऊ पीजीआई के राजधानी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल पहुंचे कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक को सीधे आईसीयू में शिफ्ट किया गया। आईसीयू प्रभारी डॉ. देवेंद्र गुप्ता की निगरानी में डॉक्टरों की टीम ने बृजेश पाठक का इलाज शुरू कर दिया है।

कैबिनेट मंत्री पांच अगस्त को कोरोना पॉजिटिव आये थे। इसके बाद उन्होंने खुद को आवास में ही आइसोलेट कर लिया था। इस बारे मेें कानून मंत्री पाठक ने एक ट्वीट कर जानकारी दी थी कि कोरोना के लक्षण होने के बाद मैंने डॉक्टरों की सलाह पर अपना टेस्ट कराया था जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक ने आगे लिखा कि पिछले कुछ दिनों के दौरान जो लोग भी मेरे संपर्क में आए हैं उनसे अनुरोध है कि वे सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए खुद क्वारंटाइन हो जाएं और अपनी जांच कराएं। कैबिनेट मंत्री को शनिवार रात अचानक सांस लेने तकलीफ हुई। लिहाजा रविवार सुबह मंत्री के स्टाफ ने उन्हें आवास से ले जाकर पीजीआई के कोविड अस्पताल में भर्ती करवा दिया।

आपको बता दें कि इससे पहले प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मोती सिंह और महेंद्र सिंह भी कोरोना की जद में आ चुके हैं। इसके अलावा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी इस वायरस के मरीज हुए हैं।

‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देने के लिए राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान- रक्षा क्षेत्र के 101 उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध….

‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देने के लिए राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान- रक्षा क्षेत्र के 101 उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध…

नई दिल्ली,। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को रक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ अहम ऐलान किए। उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर कदम बढ़ा रहा है। इसके तहत 101 रक्षा उपकरणों के आयात को प्रतिबंधित किया गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने 101 उपकरणों की एक सूची तैयार की है, जिनके आयात पर यह प्रतिबंध लागू होगा। यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। राजनाथ सिंह ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 स्तंभों अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रणाली, जनसांख्यिकी और मांग के आधार पर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए स्पष्ट आह्वान किया है। इसके लिए प्रधानमंत्री ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नाम से एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा भी की है।’

उन्होंने कहा, ‘रक्षा मंत्रालय ने यह सूची सशस्त्र बलों, सार्वजनिक और निजी उद्योग सहित सभी हितधारकों के साथ कई दौर के परामर्श के बाद तैयार की है। इस दौरान भारतीय उद्योग की वर्तमान और भविष्य की क्षमताओं का आकलन भी किया गया।’ राजनाथ सिंह ने बताया कि तीनों सेनाओं ने 260 योजनाओं के तहत इन सामानों का अप्रैल 2015 से अगस्त 2020 के बीच 3.5 लाख करोड़ रुपए का ठेका दिया। उन्होंने कहा कि अनुमान है कि अगले 6-7 साल में घरेलू उद्योग को करीब 4 लाख करोड़ रुपए के ठेके मिलेंगे।

केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा, ‘आयात पर बैन को 2020 से लेकर 2024 के बीच लागू करने की योजना है। हमारा उद्देश्य सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं के मामले में रक्षा उद्योग को आगे बढ़ाना है ताकि स्वदेशीकरण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।’

प्रतिबंधित उपकरणों में क्या-क्या शामिल?

राजनाथ सिंह ने कहा कि जिन 101 उपकरणों पर बैन लगाया गया है, उनमें सिर्फ छोटे पार्ट्स शामिल नहीं हैं, बल्कि उसमें कुछ उच्च तकनीक वाले हथियार सिस्टम भी हैं जैसे- आर्टिलरी गन, असॉल्ट राइफलें, कोरवेट, सोनार सिस्टम, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, एलसीएच, रडार आदि। इससे पहले रक्षा मंत्रालय के कार्यालय ने ट्वीट किया, ‘रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह आज 10:00 बजे महत्वपूर्ण ऐलान करेंगे।’

सीमा पर जारी है भारत-चीन के बीच तनातनी…..

बता दें कि पूर्वी लद्दाख में पिछले लंबे समय से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर तनातनी चल रही है। चीनी सैनिकों को पीछे भेजने की प्रक्रिया के तहत दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत जारी है। इसी सिलसिले में शनिवार को दोनों देशों के सेनाओं के बीच दौलतबेग ओल्डी में मेजर जनरल स्तर की बातचीत हुई, जिसमें टकराव टालने के उपायों पर चर्चा हुई। सेना की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है लेकिन सूत्रों ने सकारात्मक प्रगति होने का दावा किया है।

पीएम किसान के तहत 8.55 करोड़ किसानों के खातों में भेजे गए 17 हजार करोड़ रुपए,1 लाख करोड़ रुपए की वित्तपोषण की शुरुआत……

पीएम किसान के तहत 8.55 करोड़ किसानों के खातों में भेजे गए 17 हजार करोड़ रुपए,1 लाख करोड़ रुपए की वित्तपोषण की शुरुआत…..

नई दिल्ली,। पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को 8.5 करोड़ किसानों के खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) योजना के तहत 2 हजार रुपए की छठी किस्त जारी की। 8.55 करोड़ किसानों के खातों में 17 हजार करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। इसके साथ ही पीएम मोदी ने 1 लाख करोड़ रुपए की वित्त पोषण सुविधा का शुभारंभ किया।

पीएम किसान योजना के तहत सभी पात्र किसान परिवारों को सालाना 6 हजार रुपए की राशि दी जाती है। इस योजना की शुरुआत से अब तक लगभग 10 करोड़ किसानों को इसका फायदा मिला है। इस किस्त के बाद अब तक किसानों को करीब 92 हजार करोड़ रुपए भेजे जा चुके हैं।

कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड…..

प्राइमरी कृषि को-ऑपरेटिव संस्थानों को केवल 1 पर्सेंट ब्याज दर पर 1128 करोड़ रुपए ऋण की स्वीकृति दी जी जाएगी। ब्याज में 3 पर्सेंट की छूट और 2 करोड़ रुपए तक के ऋण पर सरकार गारंटी देगी। कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउथ और मार्केटिंग सुविधाओं का विकास किया जाएगा। वित्तीय संस्थायों द्वारा एक लाख करोड़ रुपए का ऋण उपलब्ध कराने की सुविधा होगी। प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां, कृषि उत्पादक संघ, किसान स्व-सहायता समूह, कृषि उद्यमी और स्टार्ट अप्स पात्र होंगे।

मथुरा