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बरेली के सेंट मारिया स्कूल में रोज नये विवाद

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दस साल से पढ़ रहे स्टूडेंट्स के कक्षा 11 में दाखिले से इंकार पर भड़के अभिभावकों और स्टूडेंट्स का डीआईओएस आफिस पर हंगामा

बरेली। सेंंट मारिया गौरेटी इंटर कालेज, एक ऐसा नाम जिसमें अपनी पुत्री का दाखिला कराना हर पिता चाहता है। मशहूर फिल्म अभिनेत्री प्रियंका चौपड़ा ही नहीं तमाम आईएएस और आईपीएस बेटियां इस स्कूल से पढ़कर निकली हैं। पुलिस प्रशासन सैन्य अफसरों के साथ ही न्यायिक अफसरों की बेटियां भी इस कालेज में पढ़ती हैं। कैंट के शांत इलाके में स्थित इस कालेज में पिछले कुछ समय से बहुत कुछ गड़बड़ चल रहा है। कभी दो हजार रुपये तक लेट फीस वसूली जाती है तो कभी शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत गरीब बच्चों को दाखिले से मना कर दिया जाता है। मिशनरी सोसायटी द्वारा संचालित इस स्कूल को जहां पढ़ाई और अनुशासन के लिए पहचाना जाता था वहीं आजकल रोजाना कोई न कोई नया विवाद खड़ा हो रहा है। इस सबसे कालेज की साख पर तो असर पड़ ही रहा है वहीं पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

सेंट मारिया गौरेटी इंटर कालेज में ताजा विवाद हाईस्कूल पास कर चुकी स्टूडेंट्स को दाखिला नहीं देने का है। कालेज में 175 स्टूडेंट्स ने हाईस्कूल की परीक्षा दी थी जिसमें सभी उत्तीर्ण हुईं। कालेज प्रबंधन ने रिजल्ट आने से 15 दिन पहले ही अभिभावकों को बुलाकर एडमिशन के लिए कहा। प्रधानाचार्य का जोर कामर्स में दाखिले पर था। दवाब में कई अभिभावकों ने बिना रिजल्ट आए ही कक्षा 11 मेे अपनी बच्ची का एडमिशन करा दिया। सात मई को रिजल्ट आया तो बिना मार्कशीट की प्रतीक्षा करे हुए कालेज प्रबंधन ने नौ मई को दाखिले और दस मई को टीसी के लिए अभिभावकों को बुलाया। जो अभिभावक स्कूल पहुंचे उन्हें सीआईएससीई की कथित गाइडलाइन का तर्क देकर प्रधानाचार्य सिस्टर अल्फांसों ने समझाने का प्रयास किया। प्रधानाचार्य ने कहा कि सीआईएससीई की गाइडलाइन है कि 75 प्रतिशत से कम वाले स्टूडेंट्स को मैथ्स और बायोलाजी नहीं दी जा सकती। कामर्स में 65 प्रतिशत से कम अंक पर दाखिला नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं 175 में से 34 स्टूडेंट्स के नंबर कम थे उन्हें दाखिला ही देने से प्रधानाचार्य ने मना करते हुए टीसी लेने को कहा। ऐसे में अभिभावकों को भड़कना स्वाभाविक ही है। अभिभावकों का कहना है कि उनकी बेटी स्कूल में कक्षा एक से पढ़ रही है। अब कक्षा 11 में वो कहां उसका एडमिशन करायें। प्रधानाचार्य ने 75 प्रतिशत माक्र्स की जिस गाइडलाइन की बात की है वैसा कोई निर्देश सीआईएससीई का है ही नहीं।

डीआईओएस का घेराव किया स्टूडेंटस ने

बरेली। सेंट मारिया गोरेटी स्कूल में १०वीं में अच्छे अंकों से पास होने वाली ३४ छात्राओं को पिं्रंसिपल ने प्रवेश देने से साफ इंकार दिया। इस से परेशान स्कूल की करीब ३४ छात्राओं और अभिभावकों ने आज डीआईओएस आफिस पर जमकर हंगामा किया। हंगामा इतना बढ़ा कि डीआईओएस को अपनी सीट छोड़कर द$फ्तर के बाहर आकर छात्राओं और अभिभावकों को शांत कराना पड़ा। डीआईओएस के दफ्तर के बाहर आते ही छात्राओं और अभिभावकों ने अपनी मांगों को पूरा करने को लेकर इनको घेर लिया। अभिभावक अपने बच्चों के प्रवेश के लिए जिद पर ही अड़े रहे। हंगामा कर रहे अभिभावकों को शांत करने के लिए कई बार डीआईओएस डॉ. अचल कुमार मिश्रा प्रयास किया। लेकिन छात्राओं की मांग रही कि पहले उन्हें प्रवेश के लिए अनुमति दी जाए। आखिर कार छात्राओं से लिखित में शिकायत मिलने के बाद डीआईओएस ने स्कूल प्रिंसिपल से बात कर प्रवेश कराने की बात कही।

मनमर्जी दे रही विषय

वहीं दूसरी ओर छात्राओं का आरोप है कि स्कूल में पर्याप्त सीटें होने के बाद भी स्कूल प्रिसिंपल ने प्रवेश देने से इंकार कर दिया। दूसरी ओर ११वीं में मनमाने विषय दिया जा रहा है। जिन छात्राओं को साइंस चाहिए इन्हें स्कूल वाले जबरन तरीके से कला वर्ग से इंटरमीडियट की पढ़ाई करने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इस इस बात को लेकर भी कई अभिभावकों ने स्कूल की इस मनमानी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

दो हजार वसूली लेट फीस

शुल्क अध्यादेश लागू होने के कारण फीस कम होने की उम्मीद में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने सत्र 2018-19 में समय से फीस जमा नहीं की। सेंट मारिया गौरेटी इंटर कालेज में ऐसे अभिभावकों से दो हजार रुपये तक लेट फीस वसूली गयी। ऐसा तब हुआ जब सेंट मारिया की प्रधानाचार्य खुद शुल्क अध्यादेश कमेटी की मेंबर हैं।

कैंट बोर्ड से बिना अनुमति जूनियर विंग का निर्माण

सेंट मारिया गोरेटी इंटर कालेज जिस जमीन पर बना है वो उसे लीज पर मिली हुई है। स्कूल में कई साल पहले जूनियर विंग का निर्माण बिना रक्षा संपदा विभाग और कैंट बोर्ड की अनुमति के करा लिया गया। तब स्कूल को नोटिस दिये गये लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया गया।

शिक्षा का अधिकार के तहत दाखिलों से इंकार

गरीब बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए शिक्षा के अधिकार के तहत सरकारी और प्राइवेट हर स्कूल में एक निश्चित कोटे के तहत गरीब बच्चों के दाखिले लिए जाने के निर्देश शासन के हैं। सेंट मारिया गौरेटी इंटर कालेज में शिक्षा के अधिकार के तहत कोई दाखिले नहीं होते हैं। मामला जिला विद्यालय निरीक्षक डा. अचल कुमार मिश्रा तक पहुंचा तो उन्होंने कालेज को नोटिस दिया जिस पर प्रवंधन ने कह दिया कि हम माइनारिटी संस्थान हैं हम पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू नहीं होता है। अब डीआईओएस ने फिर नोटिस जारी करके कालेज से इसका रिकार्ड मांगा है।

लीज को लेकर रक्षा संपदा का नोटिस

कालेज जिस जमीन पर बना है वो उसे तीस साल कसी लीज पर मिली थी। लीज ११ फरवरी, २०२० को समाप्त हो रही है । उससे पहले ही रक्षा सम्पदा विभाग ने कालेज प्रबंधन को नोटिस जारी करके कालेज के लिए जमीन की अन्यंत्र व्यवस्था करने को कहा है। ताकि ऐन वक्त पर कोई विवाद खड़ा नहीं हो। कालेज प्रबंधन के लिए एकदम जमीन खरीद कर नया भवन बनाना इतना आसान काम नहीं होगा।

स्कूल के बाहर की जमीन पर कब्जा ले सकता है रक्षा संपदा विभाग

स्कूल के बाहर काफी जमीन खाली पड़ी है। जिस पर अभिभावकों के वाहनों के साथ ही स्टूडेंट्स को लाने वालीं बसें, आटो वैन आदि वाहन खड़े होते हैं। इतना ही नहीं स्कूटी से स्कूल आने वाली स्टूडेंट्स के वाहन भी बाहर ही खड़े होते हैं। यह जमीन रक्षा संपदा विभाग की है। विभाग इस जमीन पर कब्जा लेने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। ऐसा हुआ तो अभिभावक और स्टूडेंट्स को लाने वाले चालक अपने वाहन कहां खड़े करेंगे।

एडमिशन में कोटा

लड़कियों की शिक्षा के लिए सेंट मारिया गौरेटी इंटर कालेज शहर का नामचीन कालेज है। इसमें लड़की का एडमिशन कराना प्रतिष्ठित बात माना जाता है। स्कूल सैन्य क्षेत्र में बना है इसलिए सेना अफसरों इसमें दाखिले के लिए 40 प्रतिशत कोटा चाहिए। इस कोटे में भी कैंट बोर्ड के मेंबर को कोटा दिये जाने का प्रस्ताव कैंट बोर्ड की मीटिंग में पारित हो चुका है। इस प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक मेंबर एक एक एडमिशन करा सकता है। यह एडमिशन हर कक्षा में एक एक होगा या केवल एक इसे लेकर भी भ्रम बना हुआ है। कालेज की प्रधानाचार्य जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की गुहार लगा चुकी हैं। इनका कहना है कि कालेज माइनारिटी संस्थान है। इस पर यह कोटा नियम लागू नहीं होता है।

कार्यवाहक प्रधानाचार्य के फैसलों से बिगड़ रहा माहौल

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