Home आपका शहर चिंतन:श्रेष्ठ कर्म सुगंधित करते है समाज को:ठाकुर संजीव कृष्ण…

चिंतन:श्रेष्ठ कर्म सुगंधित करते है समाज को:ठाकुर संजीव कृष्ण…

राधे-राधे ॥आज का भगवद् चिंतन ॥
20-05-2020
जिस प्रकार असली फूलों को इत्र लगाने की जरूरत नहीं होती वो तो स्वयं ही महक जाया करते हैं। उसी प्रकार अच्छे लोगों को किसी प्रशंसा की जरूरत नहीं होती। वो तो अपने श्रेष्ठ कर्मों की सुगंधी से स्वयं के साथ – साथ समष्टि को महकाने का सामर्थ्य रखते हैं।

इत्र की खुशबु तो केवल हवा की दिशा में बहती है मगर चरित्र की खुशबु वायु के विपरीत अथवा सर्वत्र बहती है। अपने अच्छे कार्यों के लिए किसी से प्रमाणपत्र की आश मत रखो, आपके अच्छे कर्म ही स्वयं में सर्वश्रेष्ठ प्रमाणपत्र भी हैं। जीवन में एक बात हमेशा याद रखना कि आपके अच्छे कार्यों को जगत में किसी ने देखा हो या नहीं मगर जगदीश ने अवश्य देखा है। उस प्रभु ने अवश्य देखा है।

आपके चाहने से आपको कोई पुरस्कार मिले या नहीं मगर आपके अच्छे कर्मों के फलस्वरूप एक दिन उस प्रभु द्वारा आपको अवश्य पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा।

ये बात भी सत्य है कि आपकी प्रशंसा तब नहीं होती जब आप चाहते हैं। अपितु तब होती है, जब आप अच्छे कर्म करते हैं। पानी पीने से प्यास स्वतः बुझती है, अन्न खाने से भूख स्वतः मिटती है और औषधि खाने से आरोग्यता की प्राप्ति स्वतः हो जाती है। इसी प्रकार अच्छे कर्म करने से जीवन में श्रेष्ठता आती है और समाज में आपका सम्मान स्वतः बढ़ जाता है।

अतः सम्मानीय बनने के लिए नहीं अपितु सराहनीय करने के लिए सदा प्रयत्नशील रहें।

संजीव कृष्ण ठाकुर जी
वृन्दावन