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चिंतन:जहाँ धर्म रुपी साधना है वहाँ साधनों के अभाव में भी सुख और शांति है.ठाकुर संजीव कृष्ण

राधे राधे ॥ आज का भगवद चिन्तन ॥
21-07-2020
श्रावण मास शिव तत्व
भगवान शिव की आराधना के पवित्र श्रावण मास में चिन्तन करें कि शिवजी की सवारी नंदी (बैल) का क्या अभिप्राय है ? बैल अर्थात धर्म, बैल धर्म का स्वरूप है। बैल की सवारी करना अर्थात प्रत्येक कर्म धर्मानुसार करना।
जिस मनुष्य के जीवन में धर्म नहीं वह साधन सम्पन्न रहने पर भी दुखी ही रहता है और जहाँ धर्म रुपी साधना है वहाँ साधनों के अभाव में भी सुख और शांति ह। प्रसन्नता भीतर की स्थिति है। धर्माचरण करने से नव संकल्पों का सृजन होता है और भीतर तृप्ति बनी रहती है।
महादेव प्रत्येक क्षण इसलिए प्रसन्न नहीं रहते कि उनके पास साधन हैं वल्कि इसलिए प्रसन्न रहते हैं कि उनके पास धर्म रुपी साधना है। शिव धर्म पर सवार हैं इसीलिए वो महादेव हैं। हमें ये समझना होगा कि सुख धन नहीं धर्म से ही प्राप्त होगा।

संजीव कृष्ण ठाकुर जी
श्रीधाम वृन्दावन