Home आपका शहर चिंतन:श्रीराम केवल आस्था नहीं है जीवन की आदर्श व्यवस्था है:ठाकुर संजीव कृष्ण….

चिंतन:श्रीराम केवल आस्था नहीं है जीवन की आदर्श व्यवस्था है:ठाकुर संजीव कृष्ण….

राध – राधे ॥आज का भगवद् चिंतन॥
05-08-2020
श्रीराम केवल आस्था नहीं ह अपितु राम जीवन की एक अवस्था और जीवन की आदर्श व्यवस्था है।जो रोम रोम में बसे हुए हैं बस वही तो राम हैं। राम इस राष्ट्र के प्राण हैं और पावन राम मंदिर का निर्माण इस भारतवर्ष में मृतप्राय संवेदनाओं को जागृति प्रदान करने के साथ-साथ इस राष्ट्र में पुनः प्राणों का संचार करना है।

जिस प्रकार से बेटे आलीशान भवनों में हों और माँ बाप टेंट के किसी झोपड़े में हों तो माँ बाप के होते हुए भी ऐसी संतान अनाथ ही होती है। उसी प्रकार हमारे राम लला भी टेंट में विराज रहे थे तो ऐसी स्थिति में उनके होते हुए भी हम अनाथ ही थे। सच्चे अर्थों में आज हम सब और यह पूरा भारतवर्ष सनाथ हो गया है।

राम मंदिर निर्माण का अर्थ है उन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम चंद्र जी के महान आदर्शों की पुनर्स्थापना करना। जब राम को ही प्रतिष्ठा नहीं मिलेगी तो भला उनके आदर्शों को प्रतिष्ठा मिल पाना कैसे संभव हो सकता है..? इसलिए अयोध्या जी में केवल राम मंदिर नहीं बन रहा है अपितु प्रभु श्रीराम के आदर्शों की भी पुनर्स्थापना हो रही है, जो सदियों – सदियों तक मानव जाति के लिए एक संजीवनी का काम करने के साथ-साथ एक आदर्शवान चरित्रवान और दैवीय परिवार, समाज एवं राष्ट्र का नवनिर्माण कराती रहेगी।

प्रभु श्रीराम जी की कृपा के साथ – साथ जिन महान आत्माओं के अथक प्रयास और महान त्याग व समर्पण से आज 5 अगस्त 2020 को यह दीपावली मनाने का परम सौभाग्यशाली अवसर प्राप्त हुआ उन सभी महात्माओं को हृदय से कोटि-कोटि नमन करते हुए समस्त राष्ट्र को श्रीराम मंदिर निर्माण शिलान्यास के पावन दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं मंगल बधाइयाँ!

संजीव कृष्ण ठाकुर जी
श्रीधाम वृन्दावन