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बिजनौर: ताजा गोबर लाइए कुछ ही देर में खाद बनाकर ले जाइए बिजनौर में किसान ने लगाई अनोखी मशीन…..

बिजनौर में किसानों के खेत में अब ताजा गोबर भी खाद का काम करेगा ताजा खबर डालने से लगने वाली दिमाग से भी किसानों को मुक्ति मिल जाएगी एक किसान ने गोबर से खाद बनाने की मशीन लगाई है ताजा खबर एकदम खाद बनाने पर किसानों को हर समय साथ छोड़ देगी इससे किसानों को जैविक खेती करने के लिए भी बढ़ावा मिलेगा जमीन और फसल की जरूरत के हिसाब से पोषक तत्वों वाले जीवाणु हाथ में मिलाए जा सकते हैं रसायनिक खाद के खेतों में अंधाधुंध प्रयोग के बाद भी गोबर की खाद का महत्व कम नहीं हुआ है गोबर की खाद जमीन की उर्वरा शक्ति को हमेशा बढ़ाए रुक सकती है जमीन की जान बनाए रखने के लिए किसानों ने खेतों में गोबर की खाद डालते हैं लेकिन गोबर की खाद भी हर समय किसान के पास उपलब्ध नहीं होती है गोबर से खाद बनने में 3 से 6 महीने का समय लगता है अगर खाते या ना हो तो किसान कच्चा गोबर ही खेत में डाल देता है इससे खाद का पूरा लाभ खेत को नहीं मिल सकता साथ ही कच्चा खाद दीमक की खुराक भी लेता है खेत में डालने से खेत में डेरा डाल देती है और फिर फसलों को भी नुकसान पहुंचाती है इस समस्या से निजात दिलाने का काम अब मशीनों ने शुरू कर दिया है मशीन ही खाद से गोबर बना देगी वह भी कुछ ही घंटों में इससे किसानों को जैविक खेती के लिए खेतों में डालने के लिए तुरंत ही ताजा खास मिल जाएगा खेत की जरूरत या फसल की प्रगति के हिसाब से फसल में जीवाणुओं से पोषक तत्व बनाए जा सकते हैं गांव के रहने वाले किसान राजीव सिंह ने गोबर से खाद बनाने वाली मशीन लगाई है इससे किसान गोबर के खाद की जरूरत को पूरा कर सकते हैं किसान राजीव सिंह के अनुसार उन्हें मशीन लगवाने में आत्मा परियोजना प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह योगी ने जागरूक किया है
* ऐसे काम करती है मशीन*
गांव सिकंदरी के किसान राजीव सिंह के अनुसार गोवर को गड्ढे में डालकर उसमें जीवाणु वाला पानी मिलाया जाता है माल सोरस नाइट्रोजन आदि की भी तत्व की पूर्ति के लिए जीवाणुओं मिलाए जाते हैं अगर खेत में दिन में हो तो इसके खात्मे के लिए नेट राय जब मिलाया जाता है इससे तैयार बोल को मशीन के अंदर लाया जाता है अगर मशीन के में 10 कुंटल गोवर डाला जाए तो इसमें तीन कुंटल खाद मिलेगा बाकी 70% जीवामृत पानी मिलेगा यह पानी भी पोषक तत्वों से युक्त होगा इसे भी खेत में डाला जाएगा
* एक विवाह में पड़ेगा केवल 40 किलो खाद*
गोबर की खाद किसे मुख्य रूप से कार्बन मिलता है बिना कार्बन के कोई भी खाद्य से नहीं करता है सामान्य तीन चार महीने पुरानी कुड़ी में कार्बन कम होता है ऐसा खाद प्रति बीघा जमीन में 50 से 60 कुंटल डालना होता है कछुए से बनने वाला खाद एक बीघा जमीन के केवल 6 कुंटल ही डालना होता है जबकि मशीन से तैयार खाद केवल 40 किलो प्रति बीघा ही डालना होता है
* बढ़ेगी किसान की आय*
आत्मा परियोजना प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह योगी का कहना है कि राजीव सिंह की मशीन से जे खेती से किसानों को जोड़ने का मौका मिलेगा किसानों की खेत की सभी पोषक तत्वों की जरूरत को मशीन से पूरा किया जा सकता है इससे खेती की लागत घटेगी और किसान की आय बढ़ेगी