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विशेष:जी हाँ अनोखा है चित्रकूट में मुगल काल से लगने वाला गधा मेला…

 

धर्म नगरी चित्रकूट में दीपावली के एक दिन बाद मुगल कालीन रस्म के साथ हुआ गधा मेला का आयोजन

Place – चित्रकूट धाम

Report – वहीद उद्दीन

धर्म नगरी चित्रकूट में दीपावली के एक दिन बाद की रस्म गधा मेला । इस रस्म की शुरुआत की मुगल कालीन औरँगजेब ने । इस धरती में लगती है गधों की बोली । इस गधा मेला में भारी संख्या में गधों की खरीद फरोख्त । धार्मिक नगरी चित्रकूट में रामघाट में मन्दाकिनी नदी के किनारे भारी सँख्या में कई प्रदेशों से गधा लेकर आते बेचने और इस मेले का सारा इंतिजाम करता यहाँ का प्रशासन ।
वीओ- हम बात कर रहे है दीपावली के एक दिन बाद लगने वाले गधा बाजर की | जहां पर हजारों की संख्या में गधो और खच्चरो का मेला लगता है। वही कमलेश पांडेय आयोजक ने बताया कि कोरोना महामारी के भय से इन साल चित्रकूट में लगने वाला गधो का बाजार ऐतिहासिक है लेकिन बहुत मद्दा है और गिरावट है गधा भी कम आये है| इस बाज़ार कि परम्परा मुगल बादशाह औरंगजेब ने शुरू की थी | मूर्ति भंजक औरंगाजेब ने चित्रकूट के इसी मेले से अपनी सेना के बेड़े में गधो और खच्चरो को शामिल किया था | इसलिए इस बाज़ार का ऐतिहसिक महत्व है |दीपावली में लगने वाले गधा बाज़ार में आने वाले व्यापारियों को कभी घाटा तो कभी मुनाफा लगता है | और ये बाज़ार पर निर्भर होता है | व्यापारियों की माने तो गधो की यहा पर अच्छी खाशी कीमत लगती है | और गधा व्यापारी यहां कई जिलों से आते है और दीपावली के दिन और दूसरे दिन भी गधे का व्यापार में जो भी धन मिलता है। उसको बहुत ही नसीब मानते है। और दूर दूर से आते है गधेडे इनका मानना है कि आज के दिन ही क्रय विक्रय करने से लक्ष्मी आती है और ये वही स्थान है जो औरंगजेब आक्रमण किया था तभी चित्रकूट के रामघाट के नयागांव के पास नदी किनारे अरंगजेब के घुड़सवार रुके थे तभी पूरे घोड़ा खत्म हो जा रहे थे तो उसने मन्नत मांगी थी कि और उसकी मन्नत पूरी हुई थी तभी से यह पशु बाजार लगता चला आ रहा है और रामघाट के किनारे बालाजी मंदिर का निर्माण भी कराया था लोगो ऐसा मानना की यह 30 हजार से 50 हजार तक गधा बेचे खरीदे जाते है।

टीम ए बी लाइवन्यूज़