Home आपका शहर चिंतन:अभाव की सोच जीवन मे नकारत्मकता का प्रवेश है:ठाकुर संजीव कृष्ण

चिंतन:अभाव की सोच जीवन मे नकारत्मकता का प्रवेश है:ठाकुर संजीव कृष्ण

राधे राधे ॥ आज का भगवद चिन्तन ॥
27-11-2020
सुखी जीवन जीने का सिर्फ एक ही रास्ता है वह है अभाव की तरफ दृष्टि ना डालना। आज हमारी स्थिति यह है जो हमे प्राप्त है उसका आनंद तो लेते नहीं, वरन जो प्राप्त नहीं है उसका चिन्तन करके जीवन को शोकमय कर लेते हैं।

दुःख का मूल कारण हमारी आवश्कताएं नहीं हमारी इच्छाएं हैं। हमारी आवश्यकताएं तो कभी पूर्ण भी हो सकती हैं मगर इच्छाएं नहीं। इच्छाएं कभी पूरी नहीं हो सकतीं और ना ही किसी की हुईं आज तक। एक इच्छा पूरी होती है तभी दूसरी खड़ी हो जाती है।

इसलिए शास्त्रकारों ने लिख दिया
“” आशा हि परमं दुखं नैराश्यं परमं सुखं “”
दुःख का मूल हमारी आशा ही हैं। हमे संसार में कोई दुखी नहीं कर सकता, हमारी अपेक्षाएं ही हमे रुलाती हैं। यह भी सत्य है कि बिना इच्छायें ना होंगी तो कर्म कैसे होंगे ? इच्छा रहित जीवन में नैराश्य आ जाता है। लेकिन अति इच्छा रखने वाले और असंतोषी हमेशा दुखी ही रहते हैं।

संजीव कृष्ण ठाकुर जी
वृन्दावन