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वृंदावन:मैत्री घर ने मनाया अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस

 

 

मैत्री घर ने मनाया अंतरराष्ट्रीय विधवा दिव

शुभम शर्मा की रिपोर्ट

उम्र के बढ़ते पड़ाव में परिवार से बेरुखी की शिकार विधवा महिलाएं

वृन्दावन(एबी लाइव न्यूज़)।प्रत्येक वर्ष 23 जून को विश्व स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस मनाया जाता है। यह दिन व्यापक रूप से विधवाओं की आवाज़ों और उन्हें होने वाले अनुभवों पर ध्यान आकर्षित करने और उनके द्वारा किए जाने वाले अद्वितीय समर्थन को प्रोत्साहित करने के लिए जाना जाता है। आज भी विधवाए अपने जीवन साथी को खोने के बाद दुनिया भर में कई महिलाएं चुनौतियों का सामना करती हैं और बुनियादी जरूरतों, उनके मानवीय अधिकार और सम्मान के लिए लंबे समय तक संघर्ष करती हैं। भारत में लगभग 5 करोड़ विधवा महिलाएं हैं। इनकी स्थिति देश में सबसे ज्यादा खराब है एक तो औरत हैं ,ऊपर से विधवा तो हमारे समाज में जहां एक औरत जो कि शादीशुदा है उसको भी सम्मान और समान अधिकार नहीं मिलते हैं। कोई भी यह समझने की कोशिश नहीं करता कि अगर एक विधवा है और उसके बच्चे हैं तो उसे किस किस परेशानी से जूझना पड़ता है और उसकी जिम्मेवारी परिवार ,समाज और सरकार किस तरीके से लेता है।
श्री धाम वृंदावन में हजारों की संख्या में विधवा माताएं निवास करती हैं अगर जीवन यापन की बात करें तो वृंदावन के तमाम मंदिरों में भजन करके और भीख मांग कर करती हैं। कहने के लिए सरकार द्वारा कई विधवा आश्रम भी चलाए जा रहे हैं लेकिन अनदेखी के अभाव में केवल खानापूर्ति चल रही है।

श्री धाम वृंदावन की परिक्रमा मार्ग स्थित मैत्री भवन पर आज अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस मनाया गया। इस विधवा आश्रम के संचालक जनरल भूपेंद्र सिंह एव संचालिका श्रीमती बिन्नी सिंह हैं। इस संस्था के द्वारा विधवा माताओं के रहने खाने-पीने आदि की नि:शुल्क व्यवस्था की गई है। जिसमें लगभग एक सैकड़ा माताएं निवास करती हैं। मैत्री भवन के व्यवस्थापक महेश सिंह बताते हैं कि यहां रहने वाली माताओं को वैक्सीन की दोनों खुराक दिलवाई गई है। अभी तक कोई भी माता कोरोना पॉजिटिव नहीं पाई गई। यहां पर आने वाली माताएं अपने घर परिवार से दुखी होकर आती है। इसीलिए उन्हें प्यार के साथ अपनाया जाता है। मैत्री भवन में निवास करने वाली तारन बाई जो कि मध्य प्रदेश की रहने वाली है। यहां 2015 से निवास कर रही हैं। वे बताती हैं कि यहां पर मैत्री भवन के स्टाफ मेंबर्स के द्वारा सभी माताओं का पूर्ण रुप से ध्यान रखा जाता है। उनके खाने-पीने, दवाई इत्यादि का विशेष देखरेख की जाती है। यह सभी लोग हमारी सेवा में पूर्ण रूप से समर्पित है। भगवान से यही कामना है कि वह हमेशा खुश रहे। महाराष्ट्र निवासी महानंदा बताती हैं लगभग 5 वर्ष हो गए हैं और वे यहां निवास करके खुश हैं। पारिवारिक कलह के चलते उन्होंने अपना घर का परित्याग कर दिया था। बेटे बहु से न बनने के कारण वृंदावन आ गई थी और अब वे शांतिपूर्वक यहां निवास कर रही हैं।

विधवा दिवस के दिन हम समाज और पॉलिसी बनाने वाले लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करना चाहते हैं। ताकि वह हमारी समस्या को सुने और इन समस्यायों को समझने की कोशिश करें। समाज में हम सब इस कुरीतियों को रोकने की तरफ अपना कदम हर साल एक एक कर कर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं

परंतु कोई भी हमारी तरफ देखने या हमारी समस्याओं को सुनने के लिए तैयार नहीं है। हम भी समाज का एक अहम हिस्सा है और उम्र के बढ़ते पड़ाव में हम जैसी महिलाओं को समाज और सरकार- दोनो को संवेदना से देखना चाहिए और प्रयत्न करना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सेवादार श्री महेश सिंह, सेविका रेखा राय, शेर सिंह, श्रीमती गुड़िया, गौरी आदि उपस्थित रहे।