अलीगढ़:जैन साध्वियों की मौत पर जैन समाज का मौन प्रदर्शन सरकार के नाम सौंपा ज्ञापन.

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जैन साध्वियों की मौत पर जैन समाज का मौन प्रदर्शन सरकार के नाम सौंपा ज्ञापन

रीवा (मध्य प्रदेश) में विहाररत दो आर्यिका माताजी की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद पूरे देश की जैन समाज में आक्रोश है। यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना भर नहीं मानी जा सकती, उपलब्ध तथ्यों एवं वीडियो क्लिपों के आधार पर समाज में गहरी आशंका एवं चिंता का वातावरण निर्मित हुआ है। अतः इस प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जाँच अत्यन्त आवश्यक है। घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए साधु- संतों की सुरक्षा को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार से स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की। इस क्रम में सोमवार को अलीगढ़ में सकल जैन समाज की ओर से जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर हाथों में अपनी प्रमुख मांगो की स्लोगन लिखी तख्तियों को मौन जुलूस निकालकर माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार एवं माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय पर एसीएम विनीत कुमार को प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी राकेश भैया जी के सान्निध्य मे एवं पूर्व एमएलसी जगवीर किशोर जैन के मार्गदर्शन में ज्ञापन सौंपा।
उससे पूर्व जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में एकत्रित जैन समाज को इस दुःखद घटना पर कोल विधायक अनिल पराशर में अपनी संवेदना व्यक्त की और कहा कि माननीय मुख्यमंत्री को इस घटना से अवगत कराकर उच्चस्तरीय जाँच की मांग करेंगे। उधर जैन समाज के प्रतिनिधि मण्डल को राज्यमंत्री सुरेंद्र दिलेर एवं पूर्व कैविनेट मंत्री , विधायक बरौली जयवीर सिंह ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि जैन समाज की इस दुःखद घटना में हम उनके साथ है एवं पूर्ण विश्वास दिलाते है दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएंगे।
राजीव जैन ने कहा कि जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं। वे किसी प्रकार सुविधाओं का उपयोग नहीं करते तथा समाज में शांति, संयम और अहिंसा का संदेश प्रसारित करते हैं। ऐसे संतों के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएँ एवं हमले सम्पूर्ण समाज के लिए अत्यन्त चिंताजनक विषय हैं।
शरद जैन ने कहा कि हमारी प्रमुख माँगें यह कि

1. घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच
• इस प्रकरण की SIT अथवा न्यायिक जाँच कराई जाए।
• घटना से संबंधित सभी CCTV, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जाएँ।
• दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्यवाही की जाए।
• यदि सुनियोजित कृत्य अथवा षड्यंत्र के तथ्य मिलें, तो तदनुसार कठोर धाराएँ लगाई जाएँ।
2. “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू किया जाए
विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतु:
• विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय,
• संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग,
• ट्रैफिक नियंत्रण,
• चेतावनी संकेतक,
• हाईवे एवं भीड़भाड़ क्षेत्रों में विशेष सावधानी
सुनिश्चित की जाए।
3. “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाई जाए
भारत सरकार द्वारा:
• पैदल विहार करने वाले संतों हेतु राष्ट्रीय guideline,
• सुरक्षा SOP,
• तथा संवेदनशील मार्गों हेतु विशेष प्रावधान
निर्मित किए जाएँ।

4. संतों के विरुद्ध अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाए
क्योंकि:
• साधु-संत आत्मरक्षा नहीं करते,
• वाहन या सुरक्षा साधनों का उपयोग नहीं करते,
• तथा पूर्णतः अहिंसक जीवन जीते हैं।

5. प्रशासन एवं समाज के बीच समन्वय तंत्र बने
स्थानीय स्तर पर:
• “Saint Security Coordination Cell”
• एवं आपातकालीन संपर्क व्यवस्था
निर्मित की जाए।

मुनेश जैन ने कहा कि जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, कानून और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है। हमारा उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना एवं तपस्वी संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

डॉ पी.के.जैन ने कहा कि हमें पूर्ण विश्वास है कि सरकार इस अत्यन्त संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेते हुए त्वरित एवं प्रभावी कदम उठाएगा।
जो स्वयं निहत्थे होकर भी मानवता को अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं, उनकी सुरक्षा करना समाज और शासन — दोनों का नैतिक दायित्व है।”
“संत सुरक्षा केवल एक समाज का विषय नहीं, भारत की आध्यात्मिक विरासत की सुरक्षा का प्रश्न है। इस मौके पर अनिल जैन,एडवोकेट संदीप जैन,सुनील जैन,अजय कुमार जैन, एडवोकेट सजीव जैन,मयंक जैन,हेमंत जैन,नरेंद्र कुमार जैन,राकेश जैन,अंकुश जैन, यतेंद्र जैन,विनय जैन,भारत भूषण जैन,कुमोद कुमार जैन,कुणाल जैन,भारत जैन,संजय जैन,यतीश जैन ,अंकित जैन एवं पुरूष महिला उपस्थित रहे।

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