चिंतन:स्वयं की नजरों में सम्मानित बनें..

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राधे राधे

आज का चिंतन विचार.

जिन कर्मों को दूसरों से छुपाने की आवश्यकता पड़े ऐसे कर्म करने से सदैव बचना चाहिए। ऐसे कार्य न करें जिससे आपके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचे व आपको स्वयं से नजरें मिलाने में ही लज्जा का अनुभव हो क्योंकि स्वयं की नजरों में स्वयं का सम्मान ही आत्मसम्मान को जन्म देता है। चरित्र के महल निर्माण में वर्षों लग जाते हैं पर उसके पतन के लिए एक क्षण पर्याप्त होता है।

जीवन पथ पर हमारा प्रत्येक कदम विवेकपूर्वक होना चाहिए। दूसरों की नजरों में सम्मानित होने के साथ-साथ हमारा जीवन स्वयं की नजरों में भी सम्मानित होना चाहिए। प्रत्येक कार्य को करने से पहले उसके अच्छे-बुरे परिणाम का विचार अवश्य कर लेना चाहिए यही विवेकशीलता का लक्षण है। शांत चित्त, विवेकपूर्ण लिये गये निर्णय ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। सोचें, समझें फिर आगे बढें, यही आदर्श जीवन की आधारशिला है।

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