मथुरा:एमवीडीए में ‘सेटिंग’ का खेल? रिटायर्ड कर्मियों की दोबारा तैनाती पर उठे सवाल!

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“एमवीडीए में ‘सेटिंग’ का खेल? रिटायर्ड कर्मियों की दोबारा तैनाती पर उठे सवाल!”

प्रदेश सरकार भले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ

जीरो टॉलरेंस की बात कर रही हो…

लेकिन मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण यानी

Mathura-Vrindavan Development Authority

में कुछ और ही तस्वीर सामने आती दिख रही है।

 

यहां आरोप लग रहे हैं कि

‘सेटिंग’ और ‘व्यवस्था’ के दम पर

रिटायर्ड और विवादित कर्मियों को फिर से तैनात किया जा रहा है।

ताजा मामला दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों की दोबारा नियुक्ति से जुड़ा है…

जिसने पूरे प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार…

पूर्व लिपिक मुन्ना खान

को फिर से काम पर रखा गया है।

आरोप है कि उन पर पहले

बिना टैक्सी परमिट के वाहनों में तेल घोटाले का मामला सामने आ चुका है।

इतना ही नहीं…

थाना सदर बाजार में एफआईआर तक दर्ज हुई…

और शिकायत लोकायुक्त तक पहुंची थी।

वहीं दूसरे सेवानिवृत्त कर्मचारी

विजय शर्मा

की दोबारा तैनाती ने भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि उन्हें

तत्कालीन उपाध्यक्ष ने बर्खास्त कर दिया था…

हालांकि बाद में वे कोर्ट के आदेश से बहाल हुए थे।

सबसे बड़ा सवाल—

जब शासनादेश साफ कहता है कि

प्राधिकरण के कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 वर्ष है…

और उसके बाद सेवा में रखने का सामान्य प्रावधान नहीं है…

तो फिर ये दोबारा तैनाती आखिर कैसे हुई?

जब इस पूरे मामले पर

आशीष कुमार सिंह

से सवाल किया गया…

तो उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार कर दिया।

विभागीय गलियारों में चर्चा तेज है कि—

कुछ अभियंता और अधिकारी

अपने पुराने ‘सिस्टम’ और ‘वसूली तंत्र’ को बनाए रखने के लिए

नियमों को दरकिनार कर रहे हैं।

अब बड़ा सवाल ये है—

क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सरकारी मुहिम

एमवीडीए तक भी पहुंचेगी?

या फिर यहां ‘सेटिंग’ का खेल

यूं ही चलता रहेगा?

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