हरदोई:इंजीनियर बनने निकले थे,साइबर ठग बन बैठे..

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हरदोई:इंजीनियर बनने निकले थे,साइबर ठग बन बैठे,बीटेक छात्रों समेत 10 गिरफ्तार,लखनऊ से चलता था ऑनलाइन फ्रॉड का हाईटेक नेटवर्क…

 

हरदोई: दिन में बीटेक की पढ़ाई, रात में साइबर ठगी का खेल… बाहर से साधारण छात्र दिखने वाले कुछ युवकों ने ऐसा डिजिटल जाल बिछाया था, जिसमें देशभर के लोग फंसते चले जा रहे थे। लखनऊ के फ्लैटों में बैठकर यह गिरोह ऑनलाइन गेमिंग, फर्जी वेबसाइट और डराने वाले फोन कॉल के जरिए लोगों के खाते खाली कर रहा था। हर 15 से 20 दिन में ठिकाना बदलना, फर्जी सिम और बैंक खातों का इस्तेमाल करना और अलग-अलग टीम बनाकर काम करना इस गैंग की सबसे बड़ी चाल थी। आखिरकार हरदोई साइबर थाना पुलिस ने इस हाईटेक नेटवर्क की परतें खोलते हुए 10 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को इनके कब्जे से लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और फर्जी दस्तावेजों का बड़ा जखीरा मिला है।

 

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में इनके फ्रॉड के तार जुड़े मिले हैं। गैंग के सदस्य KABOOK, Sport99.vip, RolexPanel.bin और Lotus365 जैसी वेबसाइटों के जरिए लोगों को ऑनलाइन गेमिंग में मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाते थे। शुरुआत में कुछ लोगों को जीत का पैसा देकर भरोसा जमाया जाता था, लेकिन असल में वह रकम भी किसी दूसरे शिकार से ठगे गए पैसों से दी जाती थी। धीरे-धीरे लोग लाखों रुपये गंवा बैठते थे। इतना ही नहीं, यह गिरोह लोगों को फोन कर डराता भी था। किसी को कहा जाता— “तुम्हारा बेटा पकड़ लिया गया है”, तो किसी को पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे।

 

इस साइबर गैंग का पूरा सिस्टम किसी कंपनी की तरह चलता था। एक टीम लोगों को फंसाने का काम करती थी, दूसरी टीम बैंक खाते, सिम कार्ड, एटीएम और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी जुटाती थी, जबकि तीसरी टीम ठगी के पैसों को अलग-अलग खातों में घुमाने का काम करती थी। भोले-भाले लोगों को हर महीने पांच हजार रुपये कमाने का लालच देकर उनके बैंक खाते खुलवाए जाते थे। खाते खुलते ही उनमें गिरोह के मोबाइल नंबर लिंक कर दिए जाते थे और फिर उन्हीं खातों को साइबर ठगी का जरिया बना दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक मोबाइल फोनों में पहले से जीमेल लॉगिन रहती थी और गूगल पासवर्ड मैनेजर के जरिए पूरी डिजिटल कमान संभाली जाती थी, ताकि किसी भी समय पासवर्ड बदला जा सके।

 

हरदोई में हुई एक साइबर ठगी की शिकायत ने इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। साइबर थाना पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच शुरू की तो तार सीधे लखनऊ तक जा पहुंचे। कई दिनों तक पुलिस ने इनकी गतिविधियों पर नजर रखी। पता चला कि गिरोह पुलिस से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा है। आखिरकार सटीक सूचना पर दबिश देकर पुलिस ने 10 आरोपियों को धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपियों में जदवीर सिंह उर्फ जस्सी सिंह, आयुष सिंह उर्फ हिमांशू, गगन साहू, रामधीरज सिंह, लवकुश गुप्ता, लवकुश सिंह, हर्षित सिंह, अंशुमान पाण्डेय, अर्जुन कुमार रावत और शुभम गुप्ता उर्फ रजनीश गुप्ता शामिल हैं। इनमें हर्षित, अंशुमान और अर्जुन बीटेक के छात्र बताए जा रहे हैं, जो लखनऊ स्थित बीबीडी संस्थान से पढ़ाई कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक शुभम उर्फ रजनीश और जस्सी सिंह इस पूरे नेटवर्क की कमान संभाल रहे थे।

 

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 4 लैपटॉप, 2 टैबलेट, 26 मोबाइल फोन, 42 अतिरिक्त सिम कार्ड, 6 एटीएम कार्ड, 4 पासबुक, आधार कार्ड की कॉपी और भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। मोबाइल और लैपटॉप से बड़ी संख्या में यूपीआई आईडी, बैंक खातों की डिटेल और गेमिंग नेटवर्क से जुड़ा डेटा भी मिला है। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा के निर्देशन में साइबर थाना टीम ने यह कार्रवाई की। अब पुलिस गिरोह के फरार मुख्य सरगना और उससे जुड़े दूसरे नेटवर्क की तलाश में जुटी है। साइबर पुलिस का मानना है कि पूछताछ में अभी और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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