राग और द्वेष :- मन के समस्त कष्टों का जनक
मनुष्य का मन बहुत रहस्यमय है। उसको जानना अत्यंत दुष्कर है। उसे वही जान सकता है जो अपने मन में घुस सकता है।
मनुष्य का मन ही समस्त क्लेशों का जनक है। मनुष्य की उत्तेजना, चिंता, परेशानी, अवसाद, विषाद सब इस मन का ही उपहार है मनुष्यता को।
मनु, मनुष्य, मन, मौन आदि शब्द एक दूसरे से संयुक्त हैं।
पतंजलि कहते हैं कि मनुष्य के कष्टों (मानसिक) के पांच कारण हैं _ अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश।
कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि राग और द्वेष ही मानव मन की समस्त जटिलताओं और कष्टों का जनक हैं। यही सबसे सरल फॉर्मूला है इसे समझने का। पतंजलि का फॉर्मूला थोड़ा क्लिस्ट है। इसलिए उस पर फिर कभी।
*अब राग क्या है और द्वेष क्या है?*
जो कृत्य या घटना हमारे मन के अनुकूल घटती है, जिससे हमें सुख की अनुभूति होती है, जो हमें पसंद है _ वह राग है।
जो कृत्य या घटना हमारे मन के अनुकूल नहीं घटती, जिन कृत्यों और घटनाओं से हमें दुख पहुंचता है, जो हमें नापसंद है _ वह द्वेष है।
यहां जो का तात्पर्य है _ व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह, वस्तु, विचार और भाव।
अर्थात हम अपने अंदर ही दो खंडों में विभक्त हैं _ पक्ष और विपक्ष में।
जो लोग स्वयं को निष्पक्ष कहते हैं वे भ्रांति में जी रहे हैं। प्रायः पत्रकार गण अपने बारे में यह भ्रम पाले रहते हैं कि वे निष्पक्ष हैं।
जीवन जीने के लिए यह आवश्यक तत्व है कि पहचान किया जाय कि कौन शत्रु हैं और कौन मित्र है, कौन पक्ष में है, कौन विपक्ष में। सांप से मित्रता नहीं की जा सकती, यह स्पष्ट है।
परंतु यह हमारे मन में 24 घंटे, चलने लगता है, सतत। यही क्लेश और कष्टों का कारण है। क्योंकि 24 घंटे हम विचारों से घिरे रहते हैं, सिवा कुछ घंटे सोने को छोड़कर।
अब एक बार जिसके बारे में शत्रुता का भाव, नापसंदगी का भाव मन में बन गया, अब वह जीवन भर हमारे साथ रहेगा। लेकिन आवश्यक नहीं है कि यह भाव जीवन भर बना रहे। क्योंकि जिसे हम मित्र समझ रहे हैं कल को हमारे मन के अनुकूल न चला तो उसे शत्रु बनने में समय नहीं लगेगा। जिस बच्चे को मां बाप कलेजे का टुकड़ा समझकर पालते हैं, यदि वही कल को उनके मन के विरुद्ध काम करने लगे तो शत्रु बनने में देर न लगेगी l
उपचार क्या है?
उपचार है कि दिन भर फेसबुक, टी वी, न्यूज, व्हाट्सएप्प, गप्पबाजी न करो। आधा घंटा अपने लिए समय निकालो। सुखासन में बैठकर अपने मन को देखो कि उसके अंदर चल क्या रहा है?



