चिंतन:सनातन धर्म की अमरता..

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सनातन धर्म अमर है क्योंकि यह किसी एक पुस्तक या किसी एक पैगंबर पर निर्भर नहीं करता। यह तो आत्मा के उन शाश्वत नियमों पर टिका है जो समय से परे हैं — जो कल सत्य थे, आज हैं और आने वाले कल में भी सत्य रहेंगे।यह कोई सीमित या व्यक्तिगत आविष्कार नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के स्वाभाविक सिद्धांतों का जीवंत रूप है। ऋषि-मुनियों ने इन्हें अपनी साधना से जाना, पर ये नियम उनकी खोज से पहले भी मौजूद थे और सदैव रहेंगे।इस धर्म में कर्म का फल, आत्मा की यात्रा, पुनर्जन्म और मोक्ष का मार्ग सब कुछ स्वाभाविक और अनिवार्य है। यहां कोई बंधन नहीं, कोई डर नहीं, केवल सत्य की ओर बढ़ने की स्वतंत्रता है।जब-जब संसार में विषमता और अंधकार फैलता है, यह धर्म नया रूप लेकर फिर से जाग उठता है — कभी ज्ञान की ज्योति बनकर, कभी प्रेम और भक्ति की लहर बनकर।यह न पुराना है, न नया। यह तो सनातन है — अनादि, अनंत और अपरिवर्तनीय।जो इसकी गहराई में उतरता है, वह जीवन की हर चुनौती को शांति से देखने लगता है, क्योंकि उसे पता चल जाता है कि सत्य कभी हारता नहीं।इस अमरता का हमें गर्व के साथ-साथ उत्तरदायित्व भी है — इसे अपनी समझ से शुद्ध रखना, जीवित रखना और भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना।

आज का दिन शुभ मंगलमय हो

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