
अतीत मुक्त जीवन
जो बीत गया, वह लौटने वाला नहीं। कालचक्र की अटल गति को समझते हुए अतीत के प्रसंगों का विश्लेषण और चिंतन-मनन उतना ही उचित है, जितना उनमें छिपे संदेशों को ग्रहण कर अपने जीवन को समृद्ध बनाना। किंतु उनमें लिपटे रहना दूरदृष्टि का अभाव है। यह आदत व्यक्ति को नकारात्मकता के कुचक्र में फँसा देती है और उसे आगे बढ़ने से रोकती है।बीते अप्रिय क्षणों में यदि चित्त उलझा रहा, तो आगामी कार्यों के लिए आवश्यक उत्साह और ऊर्जा बच ही नहीं पाएगी। नाना रंग-रूपों से सराबोर प्रकृति की वृहत योजना में जीवन प्रतिदिन घुट-घुटकर जैसे-तैसे गुजारने के लिए नहीं है। चिंताग्रस्त, शोकाकुल चेहरा और हाव-भाव न केवल स्वयं पर बोझ बनते हैं, बल्कि आसपास के वातावरण में भी नकारात्मकता का प्रसार करते हैं।इसलिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं। वर्तमान को पूर्णतः जीएं, भविष्य की संभावनाओं को हर्ष के साथ स्वीकार करें और अतीत को केवल एक शिक्षक की तरह सम्मान दें, बंधन की तरह नहीं। जब मन मुक्त होगा, तभी जीवन अपनी पूरी गरिमा और आनंद के साथ फल-फूल सकेगा।
आज का दिन शुभ मंगलमय हो



