विधि और भक्ति :- दो विपरीत छोर
विधि और भक्ति दोनों जीवन के दो विपरीत छोर हैं।
विधि में ज्ञान है, सूचनाएँ हैं, तथ्यों और जानकारी से भरा हुआ बौद्धिक ज्ञान है। ,
भक्ति में केवल शरणागति का भाव है — पूर्ण समर्पण, हृदय की शुद्धता और विश्वास।
रावण जैसे महान ज्ञानी के पास विधि और इन्फॉर्मेशन का कितना विशाल भंडार था, यह इतिहास साक्षी है। फिर भी अंत में उसका परिणाम क्या हुआ, यह भी सबके सामने है। इसलिए केवल विधियाँ, सूचनाएँ, बौद्धिक ज्ञान और जानकारी पर्याप्त नहीं हैं।
भक्ति, शरणागत भाव, किसी की करुणा की छाया में रहना .



