चिंतन:जीवन को सहज बनाने के लिए अपनी गलतियों को स्वीकारना सीखें.. 

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राधे – राधे

आज का भगवद् चिन्तन

गलतियों को स्वीकारना सीखें

जब आप कुछ नया करते हैं तो गलतियां भी स्वाभाविक हो जाती हैं। यदि आपसे अनायास एक गलती हो जाती है तो वह जरूर क्षम्य है पर उसे छुपाने के लिए झूठ बोलकर दूसरी गलती करना यह अवश्य दंडनीय है। गलती हो जाना कोई समस्या नहीं पर एक गलती को बार-बार दोहराना यह अवश्य बहुत बड़ी गलती है। गलती हो जाना एक बात है लेकिन उस गलती को छिपाने का प्रयास करना उससे भी बड़ी गलती है।

स्वामी विवेकानंद जी कहा करते थे कि यदि आपने अपने जीवन में कभी कोई गलती नहीं की है तो उसका सीधा सा अर्थ यह है कि आपने अपने जीवन में कुछ नया नहीं किया है अथवा कुछ बड़ा नहीं किया है। हमें अपनी गलती को स्वीकारना आना चाहिए। कोई भी गलती हो जाने पर आपकी स्वीकारोक्ति ही आपको दूसरों की नजरों में क्षमा का अधिकारी भी बना देती है।

गौभक्त श्री संजीव कृष्ण ठाकुर जी
श्रीधाम वृन्दावन

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