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चिंतन:आलोचना स्वीकार्य – उपलब्धि को तैयार सार्थक जीवन के मूल मंत्र है:ठाकुर संजीव कृष्ण

राधे राधे ॥आज का भगवद चिन्तन ॥
14-09-2020
यदि कोई यह कहता है कि उसने अपने जीवन में कभी कोई गलती नहीं की, तो इसका मतलब हुआ कि उसने अपने जीवन में कुछ हटके नहीं किया, नया नहीं किया। गलती करना कोई बुरी बात नहीं, एक गलती को बार-बार करना बुरी बात है। कोई भी गलती आप दो बार नहीं कर सकते, अगर आप गलती दोहराते हैं तो फिर ये गलती नहीं आपकी इच्छा है।
उपलब्धि और आलोचना दोनों बहिन हैं। उपलब्धियाँ बढेंगी तो निश्चित ही आपकी आलोचना भी बढ़ेगी। लोग निंदा करते हैं या प्रशंसा ये महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण ये है कि जिम्मेदारियाँ ईमानदारी से पूरी की गई हैं या नहीं ?
और एक बात ! जिस काम को करने में डर लगे, उसी को करने का नाम साहस है। मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है, जैसा वह विश्वास करता है, वैसा बन जाता है। खुद पर भरोसा रखो। छोड़ो ये बात कि लोग क्या कहेंगे ? लोगों की परवाह किये बिना अपने विचारों को सृजन का रूप दे दो ताकि हर कोई कह सके ” मान गए आपको “