
चिंतन:पुरुषोत्तम मास “यत्किञ्चित्कुरुते धर्मं पुरुषोत्तममासके। तदक्षयं भवेत्सर्वं न अत्र कार्या विचारणा”
पुरुषोत्तम मास महिमा पुरुषोत्तम मास स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीहरि का ही स्वरूप है। इस मल मास को स्वयं भगवान ने अपना लोक मंगलकारी नाम प्रदान करके पुरुषोत्तम मास बनाकर कलिकाल में लोकमंगल हेतु प्रतिष्ठित किया है। इस पावन मास में किया गया कोई भी सद्कर्म निश्चित ही अक्षय पुण्य




















