
चिंतन:आसक्ति से बचाव..
ऋषि अश्मा ने जनक के साथ संवाद करते हुए मानव मन की सुख दुखानुभूति को स्पर्श किया है। *मानसानां पुनर्योनिर्दु:खानां चित्तविभ्रम:।* *अनिष्टोपनिपातो वा तृतीयं नोपापद्यते।।* ( महाभारत, शांतिपर्व 28, 12 ) मानसिक दुःखों का बार- बार जन्म दो ही कारणों से होता है — चित्त का विभ्रम ( भ्रम,




















