
हाथरस में ₹10 के पोस्टल ऑर्डर गायब, RTI कानून को पंगु बनाने की साजिश का आरोप
RTI कार्यकर्ता एसोसिएशन ने डाक विभाग को दी 7 दिन की चेतावनी, आंदोलन और हाईकोर्ट जाने की कही बात
हाथरस। हाथरस जिले के मुख्य डाकघर सहित सभी उप-डाकघरों में ₹10 के भारतीय पोस्टल ऑर्डर (IPO) की लगातार कमी को लेकर सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन ने डाक विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने इसे सामान्य प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सूचना का अधिकार (RTI) कानून को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश करार दिया है। इस संबंध में प्रवर अधीक्षक डाकघर अलीगढ़ मंडल और पोस्टमास्टर जनरल आगरा क्षेत्र को सख्त चेतावनी पत्र भेजा गया है।एसोसिएशन का कहना है कि आरटीआई आवेदन शुल्क जमा करने के लिए ₹10 का पोस्टल ऑर्डर अनिवार्य होता है, लेकिन हाथरस जिले के डाकघरों में महीनों से इसका स्टॉक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। हर बार “स्टॉक खत्म है” कहकर नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं को वापस भेज दिया जाता है। आरोप लगाया गया कि इससे आम नागरिक सरकारी विभागों से जानकारी मांगने और भ्रष्टाचार उजागर करने से वंचित हो रहे हैं।सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि ₹10 के पोस्टल ऑर्डर की कृत्रिम कमी भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का माध्यम बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भ्रष्ट तत्वों की मिलीभगत से आरटीआई व्यवस्था को बाधित किया जा रहा है। वहीं जिला महामंत्री राजेंद्र वार्ष्णेय ने कहा कि जनता को ₹10 के स्थान पर ₹20 और ₹50 के पोस्टल ऑर्डर खरीदने के लिए मजबूर करना आर्थिक शोषण है।एसोसिएशन ने मांग की है कि आगामी तीन कार्य दिवसों के भीतर हाथरस जिले के सभी डाकघरों में ₹10 के पोस्टल ऑर्डर का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए तथा कृत्रिम कमी पैदा करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए।संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो अलीगढ़ मंडल कार्यालय पर तालाबंदी और उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही महानिदेशक डाक विभाग, केंद्रीय सूचना आयोग और उच्च न्यायालय में शिकायत एवं याचिका दायर की जाएगी।



