
पुरुषोत्तम मास महिमा
पुरुषोत्तम मास स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीहरि का ही स्वरूप है। इस मल मास को स्वयं भगवान ने अपना लोक मंगलकारी नाम प्रदान करके पुरुषोत्तम मास बनाकर कलिकाल में लोकमंगल हेतु प्रतिष्ठित किया है। इस पावन मास में किया गया कोई भी सद्कर्म निश्चित ही अक्षय पुण्य फल प्रदायक हमारे शास्त्रों में बताया गया है। इस मास की एक विशेषता यह भी है, कि इसमें किया गया न्यून पुण्य कर्म भी अनंत गुना अधिक फलदायी होता है इसीलिए इसको *अधिक मास* के नाम से भी जाना जाता है।
यत्किञ्चित्कुरुते धर्मं पुरुषोत्तममासके।
तदक्षयं भवेत्सर्वं न अत्र कार्या विचारणा॥
मास पर्यंत इस पावन अवधि में यथा सामर्थ्य किसी श्रेष्ठ नियम का निष्ठापूर्वक पालन करके इस सौभाग्यशाली अवसर का लाभ लेकर अपने स्वयं के कल्याण के साथ-साथ अपने पितरों व पूर्वजों की सद्गति मार्ग भी प्रशस्त कर सकते हैं। इस पावन पुरुषोत्तम मास में प्रभु नाम का जप, कीर्तन, सुमिरण, दान, गंगा स्नान व दीपदान के साथ-साथ श्रीमद्भागवत, श्रीरामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता सहित अन्य सद्ग्रंथों का यथा संभव पाठ करते हुए इस समय को सफल करते हुए अपने जीवन को सार्थक करें।
आज का दिन शुभ मंगलमय हो।



