चिंतन:जीवन में परिवर्तन..

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जीवन में परिवर्तन

 

मनुष्य जब चाहे तब अपने को श्रेष्ठ पथ का पथिक बना सकता है। किसी भी मनुष्य के लिए अंतिम क्षणों तक जीवन परिवर्तन के संभावनाओं के द्वार सदा खुले रहते हैं। वह चाहे तो सदैव अपने जीवन को उत्कृष्ट से उत्कृष्ट बनाने में अथवा निकृष्ट से निकृष्ट बना पाने में समर्थ होता है। मनुष्य जीवन के अलावा अन्य सभी प्राणी प्रकृति के ही अधीन होते हैं। उनमें जन्म के बाद अपने जीवन परिवर्तन की कोई संभावना बाकी नहीं रह जाती है।

 

मनुष्य अपने संग से, अपने संस्कारों से एवं अपने परिवेश से जीवन को परिवर्तित करने में सक्षम होता है। यदि कुसंग से अपना पतन भी करा सकता है तो सुसंग से जीवन उन्नति एवं कल्याण के मार्ग पर भी बढ़ सकता है। उस प्रभु ने कृपा करके हमको मानव देह प्रदान किया है तो फिर श्रेष्ठ पथ का अनुगमन करते हुए, श्रेष्ठ का ही चिंतन करते हुए अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहना ही जीवन की परम सार्थकता है।

 

आज का दिन शुभ मंगलमय हो।

 

 

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