
राधे – राधे
आज का भगवद् चिन्तन
विश्वास की ईंट
विश्वास की ईंट जितनी मजबूत होगी हमारे संबंधों की दीवार भी उतनी ही टिकाऊ बन पायेगी। संबधों की मजबूती के लिए परस्पर विश्वास प्रथम आवश्यक्ता है। अविश्वास प्रेम को खंडित करता है, जिससे हमारे परस्पर संबंधों की मजबूत दीवारों में भी दरारें आ जाती हैं। विश्वास ही संबंधों को प्रेमपूर्ण बनाता है। जब हमारे द्वारा प्रत्येक बात का मूल्यांकन स्वयं की दृष्टि से किया जाता है तो वहाँ अविश्वास अवश्य उत्पन्न हो जाता है।
यह आवश्यक नहीं कि हर बार हमारे मूल्यांकन करने का दृष्टिकोण सही हो इसलिए संबंधों की मधुरता के लिए अपने दृष्टिकोण के साथ-साथ दूसरों की भावनाओं तक पहुँचने का गुण भी हमारे भीतर अवश्य होना चाहिए। संबध जोड़ना महत्वपूर्ण नहीं अपितु संबंध निभाना महत्वपूर्ण है। संबंधों का जुड़ना संयोग हो सकता है पर संबंधों को निभाना जीवन की एक साधना ही है।
गौभक्त श्री संजीव कृष्ण ठाकुर जी
श्रीधाम वृन्दावन




