चिंतन:सनातन धर्म शास्त्र क्यों हैं माइंड का मैनुअल..

Picture of ablivenews

ablivenews

FOLLOW US:

SHARE:

सनातन धर्म शास्त्र क्यों हैं माइंड का मैनुअल

हमारे समस्त ग्रन्थ सिर्फ माइंड को समझने और उसका मालिक बनने की बात करते हैं। समस्त शास्त्रों के लिए यदि एक शब्द देना हो तो उन्हें “मैन्युअल ऑफ माइंड लिबरेशन” कहा जा सकता है। जैसे किसी नवीन गजेट को समझने के लिए हमें मैनुअल का उपयोग करना होता है, ठीक उसी तरह माइंड को समझने के लिये इनकी आवश्यकता पड़ती है।

हमारे शास्त्रज्ञों को उसे उस भाषा में समझाने का प्रयास करना चाहिए जो आज की भाषा है।
यह संसार के लिए भारत का एक नया योगदान होगा।

वैभवशाली और शिक्षित समाज विक्षिप्तता और पागलपन से ग्रसित होने को बाध्य है। विशेष कर जब सूचनाओं के अथाह सागर सबको सहज उपलब्ध हो तो। अमेरिका और यूरोप इसके उदाहरण हैं। वहां जिस तरह नौजवान आत्महत्या कर रहे हैं। जिस तरह एक बच्चा बंदूक लेकर कई लोगों की हत्या कर देता है। यह इस बात का प्रमाण है। यद्यपि मेरे पास कोई डेटा नहीं है परन्तु गूगल पर यह सूचनाएं उपलब्ध हैं।

अब प्रश्न उठता है कि ऐसा क्यों है?
मेडिकल साइंस इतना एडवांस होने के बाद भी?
इसका कारण है कि मेडिकल साइंस माइंड के बारे में कुछ भी नहीं जानता यद्यपि इसको जानने और समझने के लिए कम से कम 5 से अधिक स्पेशलिटीएस हैं: न्यूरोमेडिसिन न्यूरोसर्जरी, साइकाइट्री, न्यूरो साइकाइट्री, साइकोलॉजी, न्यूरो immunology. मेडिकल साइंस सिर्फ ब्रेन के बारे में जानता है जो कि शरीर और माइंड के बीच का electrico-केमिकल कनेक्शन है। जिस तरह बिजलीघर, खम्भे, तार तथा उनसे चलने वाले उपकरणों का लाख ज्ञान होने पर भी बिजली को नहीं जाना जा सकता, वैसे ही ब्रेन और उससे जुड़े हुए सिस्टम की बारीक जानकारी होते हुए भी माइंड को नहीं जाना जा सकता।

अब बात करते हैं संसार के अन्य रिलीजन और मजहबों के ग्रंथों की। वे एक विशेष किस्म का माइंड_सेट निर्मित करने के शास्त्र हैं। हम चाहे ईसाई ग्रंथों की बात करें चाहे मुस्लिम ग्रंथों की। उस माइंड सेट से जकड़ा हुआ व्यक्ति संसार का विनाश कर सकता है, संसार का कोई भला नहीं कर सकता। 2000 साल का इतिहास हमारे सामने है। वह इस बात का गवाह है। ये “मैनुअल ऑफ माइंड सेटिंग” हैं। माइंड को ये एक विशेष ढांचे में सेट करते हैं।

तो अभी भी हमारे पास एक ऐसा अचूक अस्त्र है जो संसार में किसी के पास नहीं है। यही एक मात्र कारण है कि जब कोई महात्मा, जो माइंड पर पूरी पकड़ रखता है, वह पश्चिम में जाता है। चाहे ओशो हों या सद्गुरु, उनके पीछे पीछे संसार घूमने लगता है।

 

[the_ad id='179']

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *