चिंतन:श्री बालकृष्ण प्रभु का प्रथम गौचारण उत्सव ही है गोपाष्टमी..

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राधे – राधे

 

॥आज का भगवद् चिंतन॥

|| शुभ गोपाष्टमी ||

गौवंश की सेवा एवं रक्षा भी भगवान श्रीकृष्ण के इस धरा धाम पर अवतरण का एक प्रमुख उद्देश्य रहा है। श्री बालकृष्ण प्रभु के प्रथम गौचारण उत्सव को ही गोपाष्टमी महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जिस ब्रह्म की चरण रज के लिए ब्रह्मा-शंकर तक तरसते हैं वो चरण गौमाता की सेवा के लिए कंकड़-पत्थर और कुंज-निकुंजों में विचरण करते हैं। गौमाता भगवान श्रीकृष्ण को अति प्रिय हैं इसलिए स्वयं कष्ट सहकर भी प्रभु ने गौमाता को सुखी करने का प्रयास किया है।

गौमाता की सेवा के कारण ही प्रभु का नाम गोपाल पड़ा। गौ माता की सेवा परिवार में सुख-शांति, समृद्धि एवं पूर्वजों को सद्गति प्रदायक होती है। गोपाल के साथ-साथ गौमाताओं की सेवा हम समस्त सनातन धर्मावलंबियों का प्रधान कर्तव्य है। गौ सेवा ही गोपाल को रिझाने का मूल मंत्र है। गोपाष्टमी के पावन दिवस पर यथा सामर्थ्य गौमाताओं की सेवा के संकल्प के साथ इस पावन पर्व को सार्थक बनाने का प्रयास अवश्य करें।

 

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