
भीषण गर्मी का प्रकोप अपने चरम पर…
44 डिग्री तापमान, झुलसाती लू के थपेड़े, और हर चेहरे पर घर पहुँचने की बेचैनी
खचाखच भरी जनरल बोगियां, दरवाज़ों पर लटकते मुसाफिर, और ऊपर से ट्रेनों की देरी प्लेटफार्म पर इंतजार करते राहगीर सबके सब प्यास से व्याकुल, हर बूंद पानी के लिए तरसते नजर आए।
ऐसे कठिन और संवेदनशील समय में, अलीगढ़ में पिछले 27 वर्षों से निरंतर समाज सेवा में समर्पित मानव उपकार संस्था एक बार फिर मानवता की मिसाल बनकर सामने आई।
संस्था के मानव सेवकों ने आज एक बार फिर अलीगढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2, 3, 4, 5 पर डटे रहकर ट्रेनों का इंतजार कर रहे हजारों मुसाफिरों की प्यास बुझाने का संकल्प निभाया।
स्टेशन पर आई मगध एक्सप्रेस, स्वतंत्रता सैनानी एक्सप्रेस,अप एवं डाउन गोमती एक्सप्रेस, महाबोधि एक्सप्रेस, हावड़ा-दिल्ली स्पेशल,अलीगढ़-टूंडला जैसी ट्रेनों के खचाखच भरे जनरल डिब्बों में सवार यात्रियों को शुद्ध एवं शीतल आरओ जल निःशुल्क उपलब्ध कराया गया।
संस्था के सेवक हर डिब्बे की खिड़कियों तक पहुँचे,यात्रियों की खाली बोतलों को भर-भरकर उन्हें राहत पहुँचाई—मानो तपती दोपहर में किसी ने जीवन की ठंडी फुहार दे दी हो।
संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी के अनुसार, यह जल सेवा संस्था के सहयोगी अवधेश अग्रवाल “खैर वालों” द्वारा अपने पौत्र कर्णिक बंसल के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर कराई गई। इस पुनीत कार्य ने जन्मदिन को केवल उत्सव नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना का अनुपम उदाहरण बना दिया।इस सेवा कार्य में संस्था के मानव सेवक—विष्णु कुमार बंटी, सत्यनारायण दीक्षित एवं विवेक अग्रवाल “चॉकलेट” सहित अन्य सहयोगियों ने तन-मन से भाग लेकर मानवता का संदेश दिया।
मानव उपकार संस्था के इस सेवा कार्य की सिर्फ़ राहगीर ही नही रेलवे के अधिकारी संजय शुक्ला ,स्टेशन अधीक्षक एम.के.उपाध्याय ,आरपीएफ एवं जीआरपी से जुड़े लोग भी तारीफ करते हुऐ सहयोग कर रहे हें
जब सूरज आग उगल रहा था, तब ये सेवक छांव बनकर खड़े थे.
जब हर कोई प्यास से व्याकुल था, तब ये जीवन का अमृत बाँट रहे थे।
यहीं है सच्ची सेवा, यही है मानवता जो हर हाल में दूसरों के काम आए।



