
चंदौसी कोतवाल ने नाम किया उजागर पीड़ित महिला का जिसने ली थी न्यायालय की शरण
वैसे बता दें कि अभी हाल ही में पीड़िता की पहचान उजागर करने पर पुलिस को फटकार, हाईकोर्ट ने दिया 25 लाख मुआवजा देने का आदेश
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने चेन्नई में अन्ना विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा पर हुए यौन उत्पीड़न का स्वत: संज्ञान लिया है। NCW अध्यक्ष ने तमिलनाडु के DGP को शिकायतकर्ता को मुफ्त चिकित्सा देखभाल और सुरक्षा प्रदान करने, और शिकायतकर्ता की पहचान सार्वजनिक करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
धारा 72: पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा
धारा 72 यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
उप-धारा (1)
बलात्कार या संबंधित अपराधों (धारा 64, 65, 66, 67, 68, 69, 70 या 71 के तहत) के पीड़ित का नाम या कोई भी जानकारी छापना या प्रकाशित करना निषिद्ध है। इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर दो साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।1. यदि मुद्रण या प्रकाशन का आदेश प्रभारी पुलिस अधिकारी या जांच अधिकारी द्वारा जांच के उद्देश्य से सद्भावपूर्वक दिया जाता है।
2. यदि पीड़ित लिखित रूप से प्रकाशन को अधिकृत करता है।
3. यदि पीड़ित की मृत्यु हो गई है, वह बच्चा है या मानसिक रूप से अस्वस्थ है, तो उसके निकटतम परिजन लिखित रूप से प्रकाशन को अधिकृत कर सकते हैं, लेकिन केवल किसी मान्यता प्राप्त कल्याण संस्थान या संगठन के अध्यक्ष या सचिव को।
4. ध्यान : इस धारा के तहत किसी भी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को प्रकाशित करना अपराध नहीं माना जाता है। यह इन मामलों में शामिल पीड़ितों की गोपनीयता और गरिमा की रक्षा करते हुए न्यायपालिका में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
भारतीय न्याय संहिता 2023 बलात्कार और संबंधित अपराधों के अपराध को संबोधित करने और रोकने के लिए कड़े उपाय प्रस्तुत करती है। कठोर दंड लगाने, पीड़ितों की पहचान की रक्षा करने और अदालती कार्यवाही के प्रकाशन को विनियमित करने के ज़रिए, संहिता का उद्देश्य संभावित अपराधियों को रोकते हुए पीड़ितों को न्याय और सहायता प्रदान करना है। ये प्रावधान यौन हिंसा के अपराधों से निपटने के लिए भारतीय कानूनी प्रणाली के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कोतवाल ने पीड़िता का नाम उजागर करता हुआ एक नोटिस सार्वजनिक तौर पर चस्पा किया जबकि दुष्कर्म के मामले में नोटिस वर्चुल नोटिस या E notice के माध्यम से भी भेजा जा सकता हैं।प्रश्न यह है कि ऐसे में नोटिस सार्वजनिक करने की आवश्यकता क्यों? सूत्रों की माने तो कोतवाल द्वारा पीड़िता से संपर्क करने का प्रयास ही नहीं किया गया है।




