“क्या आयुर्वेद विभाग में भी है भ्रष्टाचार का साम्राज्य..यक्ष प्रश्न:क्यों दफन है बालज़ीवन प्लस में हुई जांच रिपोर्ट ..आम जन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ क्यों ??

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“आयुष विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली की डॉ. रेखा जे. और नॉर्थ ज़ोन गाज़ियाबाद के पी. सेलवराज ने, अलीगढ़ के डॉ. नरेंद्र कुमार के साथ मिलकर की संयुक्त छापेमार कार्रवाई, उजागर हुआ अलीगढ़ में नकली दवाओं का काला कारोबार।”

अलीगढ़/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अलीगढ़ में स्थित संजय आयुर्वेदिक फार्मेसी प्राइवेट लिमिटेड, अलीगढ़ में संयुक्त निरीक्षण टीम की छापेमारी ने नकली और खतरनाक दवाओं के निर्माण का ऐसा काला सच उजागर किया है।

छापेमारी में कंपनी के शक्ति उमंग नामक उत्पाद में सेडनाफ़िल साल्ट की मौजूदगी पाई गई। यह वही खतरनाक रासायनिक तत्व है जिसका प्रयोग वियाग्रा जैसी यौन उत्तेजक दवाओं में किया जाता है।

इसके बावजूद लखनऊ के आयुर्वेद विभाग में भ्रष्टाचार की इतनी गहरी जड़ें फैली हुई हैं कि वर्षों से ऐसी जांच रिपोर्टें फाइलों में दफन होकर दम तोड़ देती हैं। नतीजतन अधिकारी कार्रवाई से बचते हैं और जनता की ज़िंदगी को सीधा खतरे में डाल दिया जाता है।

यह पहला मौका नहीं है जब इस फैक्ट्री का काला सच सामने आया हो। सन 2016 में मुरादाबाद आयुर्वेदिक ड्रग ऑफिसर ने भी एक विस्तृत जांच कर फैक्ट्री को तुरंत बंद करने की प्रबल सिफारिश की थी। लेकिन राजनीतिक दबाव और रिश्वतखोरी के आगे वह रिपोर्ट दबा दी गई और फैक्ट्री ने अपने खतरनाक उत्पादन को जारी रखा। आज इसका नतीजा यह है कि हज़ारों लोगों की ज़िंदगी पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

छापेमारी के दौरान फैक्ट्री के अंदर का हाल देखकर टीम भी हतप्रभ रह गई। जगह-जगह गंदगी, धूल और कीड़े फैले हुए मिले। कच्चा माल बिना लेबल के प्लास्टिक बैग्स में पड़ा मिला। एक बड़े एल्युमिनियम टैंक में लंबे समय से रखा अज्ञात घोल मिला, जिसमें कीड़े और सड़ांध पाई गई। आयुर्वेद औषधि की फैक्ट्री में अचार भी बनाया जा रहा था जिसमे कीड़े पड़े हुए मिले,मौके पर फ़साई का निर्माण लाइसेंस भी नहीं दिखा पाए कर्मचारी इसके अलावा सिल्डेनाफ़िल साइट्रेट का खाली ड्रम बरामद हुआ, जिसे फैक्ट्री प्रबंधन ने अन्य सामग्री रखने का बहाना बनाकर छिपाने की कोशिश की।

फैक्ट्री के कंप्यूटर सिस्टम की जांच में टाइटैनिक विगोरा 100 एमजी टैबलेट्स का डेटा और प्रिंट कॉपी मिली, जिसमें सिल्डेनाफ़िल साइट्रेट आईपी 100 एमजी का स्पष्ट उल्लेख था।

इस फैक्ट्री पर पहले भी भारत की नामी-गिरामी कंपनियों के उत्पादों की नकली पैकेजिंग और डुप्लीकेसी के मामले में मुकदमा दर्ज हो चुका है। दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान फैक्ट्री के डायरेक्टर रोहन अग्रवाल ने शपथ पत्र देकर माफी मांगी थी, लेकिन इसके बावजूद फैक्ट्री ने अपने अवैध कार्यों को जारी रखा।

संयुक्त निरीक्षण टीम ने साफ कहा कि यह फैक्ट्री जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और इसके खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। टीम ने मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द करने, सभी उत्पादन गतिविधियां बंद करने और संचालकों पर कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है।

जांच टीम में अधिकारी डॉ. रेखा जे., ड्रग्स इंस्पेक्टर, आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली, पी. सेलवराज, ड्रग्स इंस्पेक्टर, सीडीएससीओ नॉर्थ ज़ोन, गाज़ियाबाद और डॉ. नरेंद्र कुमार, जिला आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी, अलीगढ़ शामिल रहे।

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